आशु भटनागर। सत्ता के गलियारों से में पहली कथा बीते दो वर्षों से ब्राह्मण को गाली देकर पीडीए की राजनीती करने वाली समाजवादी पार्टी से है। समाजवादी पार्टी की राजनीतिक दिशा और दशा देखें तो कहा जा रहा कि सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी की गलती सपा को अब भारी पड़ रही है और इसलिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने की कवायद शुरू कर दी है। इसकी पहली बानगी अयोध्या सीट से पवन पांडे को 2027 के लिए टिकट देकर देखने को मिली। पार्टी की मंशा साफ है कि वह उस गतिरोध को तोड़ना चाहती है जो प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मणों के अपमान के साथ शुरू हुआ था। इसी क्रम में राजकुमार भाटी के दावेदार गजराज नागर की जगह सिकंदराबाद सीट से भी नवीन शर्मा का नाम लगभग तय माना जा रहा है। तमाम गुर्जर और यादव जातियों के भरपूर समर्थन के दावों के बावजूद, सपा को यह समझ आने लगा है कि केवल एक खास वोट बैंक के भरोसे सभी सीटें नहीं जीती जा सकतीं। विशेषकर शहरी और अपर-कास्ट बहुल क्षेत्रों में पार्टी को नए सिरे से गणित बैठाना पड़ रहा है। नोएडा विधानसभा सीट के गठन के बाद से आज तक समाजवादी पार्टी यहाँ कभी जीत का स्वाद नहीं चख सकी है। पार्टी ने हर बार यहाँ गुर्जर प्रत्याशी पर दांव लगाया, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। लगातार तीन बार चुनाव हार चुके सुनील चौधरी को अखिलेश यादव ने बीते वर्ष स्वयं एक बैठक में स्पष्ट कर दिया था कि वे अगली बार नोएडा से दावेदारी न करें। ठीक यही स्थिति पड़ोस की दादरी सीट पर भी देखने को मिली, जहाँ अपने नफरती बयानों से कुख्यात हो चुके प्रवक्ता राजकुमार भाटी को चुनाव लड़ने के बजाय दूसरों को चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। किंतु अब सूत्र यह कह रहे हैं कि नोएडा में मौजूदा दावेदारों की कमजोर स्थिति को देखते हुए, खुद सुनील चौधरी के ही सुझाव पर सपा एक बड़ा राजनीतिक प्रयोग करने जा रही है। चर्चा है कि शहर के एक बेहद प्रतिष्ठित ब्राह्मण शिक्षाविद, जो नोएडा में एक बड़ा स्कूल संचालित करते हैं, उन्हें 2027 के चुनाव में उतारा जा सकता है। चर्चा है कि लखनऊ में इसके नाम पर मोहर लग चुकी है और सितंबर में नोएडा सीट पर भी ब्राह्मण चेहरे की दावेदारी की घोषणा हो सकती है । बड़ा राजनीतिक सवाल यह है कि क्या किसी नए ब्राह्मण चेहरे के जरिए समाजवादी पार्टी भाजपा के इस अभेद्य किले को ढहा पाएगी? या फिर नोएडा महानगर सपा की पारंपरिक जमीनी कैडर और नए प्रयोग के बीच की आपसी गुटबाजी इस दांव को भी असफल कर देगी? PDA की आक्रामक राजनीति से अचानक ‘ब्राह्मण कार्ड’ पर आई समाजवादी पार्टी का यह प्रयोग 2027 में क्या रंग लाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
सत्ता के गलियारों में दूसरी कथा नोएडा प्राधिकरण से है जहां नोएडा के सीईओ की सभी महाप्रबंधकों और ओएसडी के साथ हुई बैठक का एक किस्सा नोएडा प्राधिकरण में चटकारे लेकर सुनाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार नोएडा में दो-दो विभाग के महाप्रबन्धक का कार्यभार संभाल रहे पूर्व मुख्य सचिव और अब सलाहकार के प्रिय एक ठाकुर साहब को सीईओ ने उनके कार्यों में हो रही देरी और लापरवाही पर पूछा कि क्या कुछ महीने बाद होने वाले उनके रिटायरमेंट के से पहले यह काम हो जाएगा ? महाप्रबंधक अभी सीईओ के सवाल से पानी पानी हो ही रहे थे उनको 440 वोल्ट का करंट तब लग गया जब उनके साथ बैठे एक साथी महाप्रबंधक ने चुटकी लेते हुए कहा कि रिटायर हो भी जाएंगे तो क्या हुआ वह फिर से यहां प्रतिनियुक्ति लेकर एक ओएसडी की तरह दिखाई देंगे। असल में पानी पानी होने वाले महाप्रबंधक दिसंबंर में रिटायर होने जा रहे है और 2 वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति के जुगाड़ में लगे हुए है। पर जो बातें नॉर्मली लोग पीठ पीछे करते हैं वह बात सीईओ के सामने हो गयी तो ये महाप्रबंधक के लिए बिल्कुल असहनीय हो गई किंतु सेवानिवृत्ति की ओर जा रहे पूर्व मुख्य सचिव के प्रिय इन महाप्रबंधक की मजबूरी देखिए कि फिलहाल वह कुछ कह भी नहीं सके और सच तो ये है कि कह भी नहीं सकते हैं क्योंकि बीते कुछ सालों में नोएडा में पानी और सीवर के कार्य को लेकर असंतुष्ट जनता से लेकर अधिकारियों तक उनके सेवानिवृत होने की राह ही देख रहे हैं ।
सत्ता के गलियारों की तीसरी कथा दादरी में हुई तिरंगा यात्रा को लेकर है जिसका एक वीडियो अब समाजवादी पार्टी के गुर्जर नेता वायरल कर रहे हैं । समाजवादी पार्टी (सपा) के युवा नेता मोहित नागर द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि कैमरे के सामने आने की होड़ में भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने अपने ही दल के वर्तमान विधायक मास्टर तेजपाल नागर को सरेआम किनारे लगा दिया। पूरा घटनाक्रम उस तिरंगा यात्रा का बताया जा रहा है जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वायरल वीडियो के मुताबिक, जब यात्रा आगे बढ़ रही थी और मीडिया के कैमरे सुधांशु त्रिवेदी पर केंद्रित थे, उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा चल रहे थे उनके पीछे चल रहे वर्तमान विधायक मास्टर तेजपाल नागर आगे आने की कोशिश करते है तभी अभिषेक शर्मा उन्हें हाथ से धक्का देकर दूर करते दिखते हैं । वीडियो में विधायक तेजपाल नागर की बेबसी साफ तौर पर देखी जा सकती है। वैसे तो नेताओं के इस तरीके से सामने रहने के वीडियो आना कोई नई बात नहीं है किंतु गुर्जरों की राजधानी कही जाने वाली दादरी विधान सभा में एक ब्राह्मण जिला अध्यक्ष द्वारा अपने ही 2 बार के गुर्जर विधायक को इस तरीके से किनारे करने का वीडियो वायरल होते ही जिले में हंगामा मच गया है। लोग अब साफ कहने लगे हैं की गुरु जी का टिकट अब तीसरी बार के लिए कटना फाइनल हो चुका है और इसकी पुष्टि लगातार भाजपा के कार्यक्रमों से हो रही है । बीते दिनों 3 अगस्त को हुए कार्यक्रम में भी दादरी विधानसभा में ही हुए प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में के बाद यह दूसरा कार्यक्रम है जिसमें विधायक इतने बेबस दिखाई दे रहे हैं । फिलहाल, इस वायरल वीडियो ने दादरी से लेकर लखनऊ तक भाजपा के भीतर खलबली मचा दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर भाजपा का कोई भी नेता या पदाधिकारी कैमरे के सामने आने या स्पष्टीकरण देने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी इस मौके को भुनाने में जुट गई है।






