ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटी पंचशील ग्रीन्स-2 में इन दिनों दहशत और असुरक्षा का माहौल है। पिछले कुछ दिनों से सोसाइटी परिसर में लगातार हो रही डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की घटनाओं ने निवासियों, विशेषकर कामकाजी पेशेवरों और उनके परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है। बेहद आपत्तिजनक बात यह है कि बार-बार शिकायत किए जाने और प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद, न तो सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम और न ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम उठा रहा है। जिम्मेदार विभागों की यह निष्क्रियता निवासियों की सुरक्षा के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, आज सोसाइटी के सजग निवासियों ने ‘शांति स्कॉटी’ (सुरक्षा दल) के साथ मिलकर पूरी सोसाइटी का दौरा किया और आवारा कुत्तों की समस्या का जमीनी स्तर पर जायजा लिया। इसके बाद, आक्रोशित निवासियों ने मेंटेनेंस टीम को एक लिखित मांग पत्र सौंपा। इस पत्र में डॉग बाइट की घटनाओं को रोकने और निवासियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।
आखिर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों?
एक आधुनिक रिहायशी सोसाइटी में बुनियादी सुरक्षा का यह हाल बेहद चिंताजनक और निराशाजनक है। आज सोसाइटी के बच्चे पार्क में खेलने से कतरा रहे हैं और बुजुर्गों का अकेले घूमना दूभर हो गया है। आखिर स्थानीय प्रशासन और मेंटेनेंस विभाग किस बात का इंतजार कर रहे हैं? क्या किसी मासूम की जान पर बन आने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे?
यह समस्या केवल आवारा कुत्तों की नहीं, बल्कि प्रबंधन की उस लचर और गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली की है जो निवासियों से मोटी मेंटेनेंस फीस वसूलने के बावजूद उन्हें एक सुरक्षित वातावरण देने में विफल साबित हो रही है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब तक की गई अनदेखी पूरी तरह से निंदनीय है।

स्थायी समाधान की तत्काल आवश्यकता
पंचशील ग्रीन्स-2 के निवासियों की यह मांग पूरी तरह से न्यायसंगत है कि इस समस्या का कोई अस्थायी पैचवर्क करने के बजाय एक स्थायी समाधान निकाला जाए। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को चाहिए कि वह पशु कल्याण नियमों के दायरे में रहकर तत्काल आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था करे, साथ ही सोसाइटी के भीतर सुरक्षित फीडिंग जोन निर्धारित किए जाएं।
समय आ गया है कि प्रशासन और मेंटेनेंस टीम कागजी आश्वासनों को छोड़कर धरातल पर कार्रवाई करे, ताकि सोसाइटी के कामकाजी पेशेवर, बुजुर्ग और बच्चे बिना किसी डर के अपने घरों से बाहर निकल सकें। सुरक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि निवासियों का बुनियादी अधिकार है।






