यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की सोमवार को हुई बोर्ड बैठक क्षेत्र के निवासियों और किसानों के लिए बड़ी सौगात लेकर आई है। इस बैठक में लिए गए फैसले न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे, बल्कि जेवर क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर एक बड़े औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी निर्णायक साबित होंगे।
किसानों की बल्ले-बल्ले: मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी
बोर्ड ने स्थानीय किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की दर में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब किसानों को उनकी जमीन के लिए 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर के बजाय 4558 रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा मिलेगा।
इतना ही नहीं, जो किसान 7 प्रतिशत आबादी भूखंड का विकल्प चुनेंगे, उनके लिए 4037 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर लागू होगी। प्राधिकरण का यह कदम सराहनीय है, क्योंकि विकास की दौड़ में किसानों को उचित हक देना न केवल न्यायसंगत है, बल्कि इससे भविष्य में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी सुगम होगी। यह फैसला दर्शाता है कि प्राधिकरण अब विकास के साथ-साथ ‘किसान कल्याण’ को भी प्राथमिकता दे रहा है।
ताइवान सिटी: क्या इस बार हकीकत बनेगा सपना?
यीडा ने क्षेत्र में ‘ताइवान सिटी’ बसाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके लिए 300 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। यहाँ मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां लगाई जाएंगी। हालांकि, यह याद दिलाना जरूरी है कि इससे पहले जापानी, सिंगापुर और कोरियन सिटी जैसे बड़े प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतर सके थे। ऐसे में प्राधिकरण के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की होगी। अगर ताइवान सिटी सफल रहती है, तो यह क्षेत्र तकनीकी क्रांति का केंद्र बन जाएगा।

सेक्टर-6 बनेगा दवाइयों का हब
स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए, सेक्टर-6 में ‘फार्मास्युटिकल फॉर्म्यूलेशन मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर’ विकसित करने का फैसला लिया गया है। 100 से 125 एकड़ में फैलने वाले इस क्लस्टर में टैबलेट, कैप्सूल और सिरप जैसी जरूरी दवाइयों का उत्पादन होगा। यह न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा करेगा।
युवाओं और खिलाड़ियों के लिए भी बड़ी सौगातें
बोर्ड ने केवल उद्योगों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास के लिए भी खजाना खोला है:
इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT): यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस अड्डे को मंजूरी।
क्रिकेट स्टेडियम और यूनिवर्सिटी टाउनशिप: युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए 500 एकड़ में शैक्षणिक और खेल परिसर।
मेडिकल हब और मंडी: किसानों को अपनी फसल का सही दाम दिलाने के लिए नई मंडी की स्थापना।
हमारी राय: विकास की नीयत साफ, अब क्रियान्वयन की बारी
यीडा बोर्ड के ये फैसले निश्चित रूप से क्षेत्र की कायापलट करने वाले हैं। मुआवजे में बढ़ोतरी से किसानों का असंतोष कम होगा और नए औद्योगिक क्लस्टर से रोजगार बढ़ेगा। लेकिन स्थानीय निवासियों की उम्मीदें अब इस बात पर टिकी हैं कि ये परियोजनाएं कितनी जल्दी पूरी होती हैं। पिछली असफल योजनाओं से सबक लेते हुए, यदि प्राधिकरण इन योजनाओं को समय सीमा के भीतर लागू करता है, तो जेवर और यमुना एक्सप्रेसवे का यह क्षेत्र आने वाले समय में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा इकोनॉमिक हब बनेगा।
कुल मिलाकर, सोमवार की यह बैठक क्षेत्र के भविष्य के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ कही जा सकती है। अब बस इंतजार है इन योजनाओं के धरातल पर उतरने का।






