मेरठ। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक परिदृश्य को साधते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नई क्षेत्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर द्वारा गठित इस 25 सदस्यीय टीम को सीधे तौर पर साल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, जहां एक ओर पार्टी इस टीम के जरिए सभी बड़े जातीय समूहों को साधने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के पारंपरिक और 100 प्रतिशत समर्पित माने जाने वाले पंजाबी और कायस्थ समाज की कथित उपेक्षा को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
रणनीतिक संतुलन और जातीय समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 71 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां जाट, गुर्जर, ब्राह्मण, राजपूत और दलित मतदाता चुनावी हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
नवाब सिंह नागर द्वारा घोषित नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय संतुलन और जातियों को साधने का पूरा प्रयास किया गया है। 25 सदस्यीय इस नई टीम में 3 ब्राह्मण, 3 ठाकुर, 2 जाट, 2 गुर्जर, 1 त्यागी और 4 दलित चेहरों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके अलावा, सैनी, लोधी, वैश्य और कश्यप समाज के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व और युवाओं (लगभग 30 प्रतिशत) को भी टीम में जगह दी गई है।
पार्टी का मुख्य उद्देश्य इस विन्यास के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को धार देना और 2027 में सभी 71 सीटों पर भगवा परचम लहराना है। क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर का स्पष्ट कहना है कि पार्टी का एकमात्र लक्ष्य संगठन को और अधिक मजबूत कर आगामी चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करना है।

पारंपरिक वोटर्स की नाराजगी और चुनौतियां
एक तरफ जहां पार्टी का यह कदम समावेशी राजनीति का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर से ही यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सवर्ण जातियों के एक हिस्से को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है?
भाजपा सूत्रों का मानना है कि पार्टी के कट्टर और अनुशासित वोटर माने जाने वाले पंजाबी और कायस्थ समाज को इस नई कार्यकारिणी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने से इस वर्ग में आंतरिक असंतोष पनप सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहरी और अर्ध-शहरी सीटों पर पंजाबी और कायस्थ मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है, जो चुनाव के समय निर्णायक साबित होती है। यदि यह वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस करता है, तो पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
किसे मिली क्या जिम्मेदारी?
पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार नई टीम में निम्नलिखित चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
क्षेत्रीय उपाध्यक्ष: विनोद त्यागी, मानसिंह गोस्वामी, हरेंद्र जाटव, प्रवीण मित्तल, बिजेंद्र कश्यप, अंकुर राणा, राजीव सिसोदिया, प्रदीप सैनी, विनोद चौधरी और सुभाष वाल्मीकी।
क्षेत्रीय महामंत्री: अशोक मोंगा, हरीश सिंह, संजीव सिक्का (गोयल) और रूपेंद्र सैनी।
क्षेत्रीय मंत्री: अजय भारद्वाज भराला, कुमुदिनी चौधरी (सैनी), सुखविंदर सोम, नितिन मलिक, महेश बाली, दीपक ऋषि गौड़, वरूण गोयल, सौरव पाल लोधी और आयुष पवार।
भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी चालें चल दी हैं। एक तरफ जहां युवाओं और बहुसंख्यक जातियों को प्रतिनिधित्व देकर चुनावी वैतरणी पार करने की रणनीति है, वहीं पारंपरिक मतदाताओं की नाराजगी को दूर करना भी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। आने वाला समय ही बताएगा कि यह नई टीम भाजपा के लिए चुनावी संजीवनी साबित होती है या असंतोष के नए समीकरण पैदा करती है।






