ग्रेटर नोएडा। अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण कार्यालय पर किसानों का ‘हल्ला बोल’ आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्राधिकरण प्रशासन द्वारा मांगों के संबंध में कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज किसानों ने अब अपने आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसान नेताओं ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक प्रतिदिन दिन के समय प्राधिकरण मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
तीन दिवसीय आंदोलन अब हुआ अनिश्चितकालीन किसान नेताओं ने बताया कि इस आंदोलन की शुरुआत पहले केवल तीन दिनों के लिए की गई थी। लेकिन तय समय सीमा के भीतर प्राधिकरण की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसी के चलते किसानों ने सर्वसम्मति से धरने को अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया। आज के धरने की अध्यक्षता जयप्रकाश आर्य द्वारा की गई।
ये हैं किसानों की मुख्य मांगें
- पुराने भूमि अधिग्रहण मामलों में किसानों को 10 प्रतिशत आबादी के भूखंडों का तत्काल निस्तारण।
- नए भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के अनुसार किसानों को 20 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित करना।
- अधिग्रहित भूमि के लिए ₹20,000 प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजे का भुगतान।
- अन्य लंबित विकास और स्थानीय मुद्दों का त्वरित समाधान।
किसान नेताओं का कहना है कि ये मांगें पूरी तरह से जायज हैं और जब तक प्राधिकरण लिखित और ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।
विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों का मिला भारी समर्थन
इस आंदोलन को क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का भी खुला समर्थन मिल रहा है। धरने में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दीपक भाटी ने पहुंचकर किसानों की आवाज बुलंद की और उनकी मांगों को जायज ठहराया।

इसके साथ ही, सीटू (CITU) के नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, सपा के फकीरचंद नागर, और किसान सभा के महासचिव गुरप्रीत एडवोकेट (महासचिव, किसान सभा) भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। युवा किसान नेताओं में भगत सिंह चेची, प्रमोद हूण, बाबा करतार, सुमित एडवोकेट, पप्पे नागर और यतेंद्र एडवोकेट ने किसानों को एकजुट रहने का आह्वान किया।
धरने में न केवल पुरुष किसान बल्कि भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। प्रमुख रूप से गबरी मुखिया, सुरेश यादव, नितिन चौहान, अशोक भाटी, संदीप भाटी, नरेश नागर, रईसा बेगम, रीना भाटी और गीता भाटी सहित सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस आंदोलन को जमीनी स्तर पर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है।






