वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने प्रदेश के 6 जिलों में जिलाध्यक्षों में बदलाव किया है। फेरबदल के इसी क्रम में गौतमबुद्ध नगर जिले में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां सुधीर भाटी की जगह इंद्र प्रधान (इन्द्रजीत भाटी) को नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति से जारी सूची के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर के पल्ला (दादरी) निवासी इंद्र प्रधान को जिले की कमान सौंपी गई है। इस बदलाव के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और स्थानीय सपा की राजनीति में कई समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। दादरी के पल्ला गांव निवासी इंद्र प्रधान बीते दो दशक से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इस बीच वह कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभालते रहे हैं। एनसीआर खबर से विशेष बातचीत में इंद्र प्रधान ने जिलाध्यक्ष बन्ने को पार्टी का आदेश बताया
राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज
नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद जिले के राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं के बीच दो तरह की चर्चाएं मुख्य रूप से सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी संगठन में इंद्र प्रधान के बढ़ते कद का संकेत है, वहीं दूसरी तरफ यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सुधीर भाटी को संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त करने का मतलब आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें चुनावी मैदान में उतारना हो सकता है। चर्चा है कि इस कदम से सुधीर भाटी को चुनाव में टिकट मिलने की संभावनाओं को और बल मिल सकता है।
इन 6 जिलों में हुए नए जिलाध्यक्षों के मनोनयन
समाजवादी पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार निम्नलिखित जनपदों में नए जिलाध्यक्ष नामित किए गए हैं:
बलिया: सुनील कुमार मौर्या (पुत्र बृजराज मौर्या, ग्राम खोरौली)
बांदा: उमेश मोहल्ला (बाबा तालाब, बांदा)
अयोध्या: जय सिंह (ग्राम बहरायें, बड़ा गांव)
पीलीभीत: धर्मेश गंगवार (ग्राम बहादुरपुर हुक्मी, बरखेड़ा कलां)
गौतमबुद्ध नगर: इन्दर प्रधान / इन्द्रजीत भाटी (ग्राम पल्ला, पोस्ट दादरी)
उन्नाव: जयचन्द्र विमल (41/33 ए0बी0 नगर)
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव गंगाराम द्वारा जारी इस सूची के बाद सभी नवनियुक्त जिलाध्यक्षों ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। बहरहाल, गौतमबुद्ध नगर में हुए इस बदलाव का आगामी चुनावों पर कितना असर पड़ता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल इस फेरबदल ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी जरूर बढ़ा दी है।





