संपादकीय : नोएडा प्राधिकरण में 882 कर्मचारियों की अगस्त माह की सैलरी रोकी, पर ये चाहिए किसे?

NCRKhabar Mobile Desk
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लगभग 3 महीने पहले नोएडा प्राधिकरण की ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर नोएडा के कुछ कपितय संगठनों (फोनरवा और नोएडा एंटरप्रेनर असोसिएशन) द्वारा रद्द किए जाने के लिए पत्र लिखा गया था । जिसके बाद एनसीआरआर खबर को प्राधिकरण के कर्मचारी नोएडा एम्पलाई संगठन के पदाधिकारिओ से बात करते हुए यह जानकारी प्राप्त हुई कि प्राधिकरण के कर्मचारियों की सैलरी बहुत कम है ऐसे में अगर उनका ट्रांसफर यहां से बाहर कर दिया जा सकता है तो उनका गुजारा नहीं होगा । यधपि तब भी फोनरवा जैसे संगठनों का इसमें क्या लाभ था ये स्पस्ट नहीं हो पाया था

इसी बीच औद्योगिक मंत्री के पुत्र की शादी आ जाने से जून में होने वाले ट्रांसफर सितंबर तक भी नहीं हो पाए जिससे कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

ताजा समाचार ये हैं कि नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों को उनकी संपत्ति की घोषणा मानव संपदा पोर्टल पर करने के आदेश के बावजूद लगभग एक तिहाई कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं की। जिसके बाद  2200 कर्मचारियों की संख्या वाले प्राधिकरण में 882 कर्मचारियों की अगस्त माह की सैलरी को रोक दिया गया ।

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ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वाकई नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों को हर माह मिलने वाली सैलरी की आवश्यकता है? नोएडा प्राधिकरण में बीते 20 वर्षों से यह आरोप लगातार लगते रहे हैं कि नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारी प्रतिदिन पूरे माह सैलरी के बराबर उतनी ऊपरी कमाई अपने घर ले जाते हैं ।

रोचक तथ्य ये भी है नोएडा एम्पलाई संगठन के अध्यक्ष राजकुमार चौधरी इन 882 कर्मचारियों द्वारा संपत्ति की जानकारी देने के लिए सरकार और सीईओ से और अधिक समय देने की मांग कर रहे हैं ।

नोएडा प्राधिकरण का एक बड़ा सच यह भी है कि बीते 20 वर्षों में रही सरकारों के मंत्रियों अधिकारियों के पुत्र पुत्री भतीजे दामाद ही यहां पर नौकरी करने आते रहे हैं । स्थाई कर्मचारियों से अलग संविदा पर रख कर्मचारियों में भी नोएडा के ही स्थानीय नेताओं के बच्चे काम कर रहे हैं ऐसे में भ्रष्टाचार को समाप्त करने की सरकार की मुहिम किस तरीके से दबाव में आ जाती है यह हम सब समझ सकते हैं ।

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बहरहाल अगस्त माह की सैलरी रोक जाने के बाद भी 882 कर्मचारियों पर इसका क्या प्रभाव या दबाव पड़ेगा यह कहना अभी जल्दबाजी होगा किंतु नोएडा के समाजसेवियों का कहना है कि सैलरी रोक जाने के साथ-साथ प्राधिकरण और सरकार को ऐसे कर्मचारियों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि उन्हें स्थानीय मीडिया में प्रकाशित किया जा सके इसके साथ ही इन सभी कर्मचारियों को यहां से ट्रांसफर, अटैच और टर्मिनेट करने की कार्यवाही भी शुरू की जानी चाहिए क्योंकि सैलरी के सहारे कर्मचारी की वित्तीय स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ता है ।

नोएडा प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि बीते चार माह में प्राधिकरण ने सेक्टर 104 हाजीपुर और बरौला में हनुमान मूर्ति के पास बनी कई बिल्डिंग पर क्रॉस के निशान लगाएं किंतु ना तो स्थानीय भूमाफिया को इससे कोई डर महसूस हुआ नहीं बिल्डिंगों का कुछ बिगड़ा । दावा है कि इन सभी बिल्डिंगों में प्राधिकरण के कर्मचारियों और स्थानीय भूमाफिया की मिली भगत रहती है जिसके कारण सीईओ द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद यह बस अखबारों में समाचार बन के रह जाते हैं। ऐसे में 882 कर्मचारियों की सैलरी ना आने से उनको कोई दंड महसूस होगा या फिर सैलरी रोके जाने के बावजूद वह प्राधिकरण में अपनी कुर्सियों पर जमे हुए है, इस बात वो बड़ी राहत महसूस कर रहे होंगे ये फैसला पाठको पर छोड़ता हूं ।

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