ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र के अपरेल पार्क के उद्यमियों और स्थानीय किसानों के लिए आखिरकार खुशी का दिन आ गया है। पिछले 10 वर्षों से लंबित किसानों के 7 प्रतिशत आबादी भूखंड के मामले को हल करते हुए, प्राधिकरण ने सेक्टर 29 के तिरथली गाँव के किसानों को आरक्षण पत्र जारी कर दिए हैं। इस कदम से न केवल किसानों का हक मिला है, बल्कि बरसों से अटके ‘अपरेल पार्क’ के विकास का रास्ता भी साफ हो गया है।
सीईओ ने स्वयं सौंपे आरक्षण पत्र
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) राकेश कुमार सिंह ने किसानों के हितों की दिशा में इस महत्वपूर्ण कदम की शुरुआत की। उन्होंने अपने हाथों से किसान वीरेंद्र कुमार को उनका आरक्षण पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही, भूलेख विभाग द्वारा 588 अन्य पात्र किसानों के आरक्षण पत्र डाक के माध्यम से उनके पते पर प्रेषित कर दिए गए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि शीघ्र ही इन सभी भूखंडों को विकसित कर किसानों को उनका भौतिक कब्जा भी सौंप दिया जाएगा।
अपरेल पार्क और ‘सिटी ऑफ अपरेल’ का सपना
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में जब यमुना प्राधिकरण के विकास की नई रूपरेखा तैयार की गई थी, तब नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के निवेदन पर केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से यहाँ गारमेंट उद्योग के लिए एक विशेष क्लस्टर ‘अपरेल पार्क’ की योजना लाई गई थी। इसके लिए नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर ने निर्यातको को यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में उधोग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कारण ही गौतम बुद्ध नगर को ‘सिटी ऑफ अपरेल’ के रूप में नई पहचान मिली। बाद में उद्यमियों के भारी उत्साह को देखते हुए यहाँ अलग-अलग क्षेत्रों में 11 क्लस्टर प्रस्तावित किए गए थे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और फिल्म सिटी जैसी बड़ी परियोजनाओं के आने से इस क्षेत्र की महत्ता और बढ़ गई थी।
सपना हो न सका अपना!
देखा जाए तो यमुना अथॉरिटी (YEIDA) के इस अपैरल पार्क में हो रही देरी और अड़चनों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
भूमि अधिग्रहण में देरी (Land Acquisition): सेक्टर 29 में स्थित इस 175 एकड़ की परियोजना के लिए लंबे समय तक पूरी जमीन उपलब्ध नहीं थी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण बुनियादी ढांचे (सिविल सुविधाएं, सीवर लाइनें) का काम अटक गया था। हाल ही में अथॉरिटी ने बाकी बची 94 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाई है।
आवंटियों द्वारा धीमी रफ्तार और नियमों का उल्लंघन: कई आवंटियों को जमीन मिलने के बावजूद उन्होंने तय समय-सीमा के भीतर फैक्ट्रियों का निर्माण शुरू नहीं किया। इसके विपरीत, कुछ आवंटियों द्वारा औद्योगिक इकाइयों के बजाय भूखंडों को त्वरित मुनाफे के लिए बेचने (प्रॉपर्टी ट्रेडिंग) के आरोप भी सामने आए।
निर्माण में देरी पर सख्त कार्रवाई: निर्माण कार्य में भारी देरी को देखते हुए यूपी सरकार के औद्योगिक विकास विभाग और अथॉरिटी ने आवंटियों को प्लॉट रद्द करने और भारी जुर्माने की चेतावनी दी थी।
किसानो को 7 प्रतिशन भूखंड का न मिलना : अपैरल पार्क क्षेत्र में किसानो से भूमि तो ली गयी पर उनको 7 प्रतिशन भूखंड नहीं दिए गए जिसके चलते किसान उधमियो को आवंटित प्लाट पर निर्माण कार्य नहीं करने दे रहे थे ।
10 वर्षों का इंतजार अब खत्म!
लम्बे समय से ही प्राधिकरण का दावा था कि अपैरल पार्क की अधिकांश बाधाएं दूर हो चुकी हैं। अथॉरिटी द्वारा आवंटन और लीज डीड का काम पूरा किया जा रहा है और विभिन्न निर्माण स्थलों पर तेजी से फैक्ट्री का काम चल रहा है। किन्तु सच ये भी था कि जिस अपरेल पार्क को क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति का आधार माना जा रहा था, उसका कार्य किसानों के 7 प्रतिशत आबादी भूखंड न दिए जाने के कारण अधर में लटका हुआ था। उद्यमी पिछले एक दशक से लगातार सरकार, मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे। ऐसे में अब आरक्षण पत्र जारी होने से उद्यमियों में एक बार फिर नई उम्मीद जगी है कि प्राधिकरण अन्य समस्याओ पर भी शीघ्र संघां लेगा जिससे अपरेल पार्क का निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सकेगा और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।



