दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गई है, जब आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपये के “सुनियोजित घोटाले” का गंभीर आरोप लगाया है। आप का दावा है कि यह घोटाला नियमों में बदलाव करके और खरीद प्रक्रिया को जानबूझकर केंद्रीयकृत करके अंजाम दिया गया है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे आधारहीन बताया है और आप को अपने दावों का आधार स्पष्ट करने की चुनौती दी है।
आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाते हुए कहा कि यह घोटाला यूँ ही नहीं हुआ, बल्कि इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि पहले अस्पतालों को सीधे सामान खरीदने की जिम्मेदारी थी, लेकिन नियमों में बदलाव कर यह जिम्मेदारी सीपीए (Central Procurement Agency) को सौंप दी गई। इसके साथ ही, डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस (Director General Health Services) बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
भारद्वाज ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 2.50 रुपये में मिलने वाले ओआरएस के 50 लाख पैकेट 15 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से खरीदे गए, जिससे सीधे तौर पर हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह अन्य चिकित्सा उपकरण भी कई गुना अधिक मूल्य पर खरीदे गए। आप का कहना है कि इस “महाघोटाले” में सरकार के शीर्ष स्तर तक के लोग शामिल हैं, जबकि कार्रवाई केवल छोटे अधिकारियों पर की जा रही है, जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इन आरोपों का खंडन करते हुए, भाजपा विधायक व मुख्य सचेतक अभय वर्मा ने आप के दावों को “निराधार” करार दिया। उन्होंने आप को चुनौती दी कि वह स्पष्ट करे कि 650 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा किस आधार पर बताया जा रहा है। वर्मा ने जोर देकर कहा कि सरकार ने किसी शिकायत का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने तत्काल विजिलेंस जांच के आदेश दिए, जिसके बाद 40 अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया और आरोपित अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। भाजपा का कहना है कि जांच पूरी होने पर ही सच्चाई सामने आएगी और आप केवल राजनीतिक लाभ के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रही है।

फिलहाल, इस मामले में विजिलेंस जांच जारी है और आरोपित अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। जहां आप इस “महाघोटाले” में उच्चस्तरीय संलिप्तता का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई का दावा कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच पूरी होने पर क्या सच्चाई सामने आती है और क्या यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर दिल्ली की राजनीति को और कितना गरमाता है।



