ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित महागुन मायवुड्स सोसायटी में जलापूर्ति की समस्या और भ्रामक जानकारी फैलाने के मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। प्राधिकरण की छवि खराब करने और निवासियों को गुमराह कर परेशान करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ प्रबंधक (जल) की ओर से बिसरख कोतवाली में महागुन बिल्डर प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
सोसायटी में पिछले कुछ समय से पानी की किल्लत चल रही थी, जो सोमवार देर रात काफी बढ़ गई। मंगलवार सुबह पानी न आने से नाराज निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बिल्डर प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सोसायटी के बाहर मुख्य सड़क को जाम कर दिया। सड़क जाम होने से इलाके में काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा।
हंगामे की सूचना मिलने के बाद सेंट्रल नोएडा के एसीपी और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (जीएम) मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने निवासियों से वार्ता की और उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद शाम करीब 5:30 बजे जाम खोला जा सका।
प्राधिकरण का रुख
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह का कहना है कि सोसायटी के अंडरग्राउंड रिजर्वायर (यूजीआर) तक पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति की जा रही है और प्राधिकरण के स्तर से सप्लाई में कोई कटौती नहीं की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डर प्रबंधन ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए प्राधिकरण के नाम पर भ्रामक सूचनाएं फैलाईं, जिससे अथॉरिटी की छवि धूमिल हुई और निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

6 हजार परिवार प्रभावित, निवासियों ने भी की एफआईआर की मांग
सोसायटी के निवासियों ने भी पुलिस को बिल्डर के खिलाफ लिखित शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। निवासियों के अनुसार, सोसायटी के तीनों फेज में रहने वाले करीब छह हजार परिवार पिछले एक महीने से पानी की अनियमतता से परेशान हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए परिसर में डिलीवरी बॉय और घरेलू सहायिकाओं के प्रवेश पर भी रोक लग गई थी, जिससे निवासियों की रोजमर्रा की गतिविधियां काफी प्रभावित हुईं।
फिलहाल पुलिस और प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।



