ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कथित लापरवाही के चलते राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के प्रथम और द्वितीय बेसमेंट में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। अस्पताल परिसर के बेसमेंट में हो रहे इस जलभराव के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे यहां कार्यरत कर्मचारियों, मरीजों और उनके तीमारदारों की जानमाल को खतरा बढ़ गया है। समस्या के समाधान के लिए जिम्स प्रशासन की ओर से बुधवार को एक बार फिर जिलाधिकारी (डीएम) और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर गुहार लगाई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिम्स के बेसमेंट में जलनिकासी (ड्रेनेज) के उचित प्रबंध नहीं हैं, जिसके कारण बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। लंबे समय से जमा पानी के कारण अब भवन के बेसमेंट में दरारें आनी शुरू हो चुकी हैं, जो इमारत की मजबूती के लिहाज से चिंताजनक है।
“जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखकर बेसमेंट में हो रहे जलभराव की समस्या से अवगत करा दिया गया है। जलभराव होने से बेसमेंट के भवनों में दरारें आ गई हैं, जिससे हादसे होने का खतरा बना रहता है। समस्या का समाधान होने से हमारे लिए बड़ी राहत होगी।”
डॉ. बिग्रेडियर राकेश गुप्ता, निदेशक, जिम्स
डायबिटीज ओपीडी और पार्किंग भी बेसमेंट में
जिम्स के इसी बेसमेंट में बनी पार्किंग में रोजाना हजारों वाहन खड़े किए जाते हैं। इसके अलावा, सप्ताह में दो दिन डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए ओपीडी भी बेसमेंट में ही संचालित की जाती है। इन दो दिनों में डायबिटीज ओपीडी में लगभग 300 मरीज पहुंचते हैं, जिन्हें जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
रोजाना 5 से 6 हजार लोगों की आवाजाही अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, जिम्स में रोजाना सामान्य ओपीडी में करीब 2,000 मरीज आते हैं। इसके अलावा लगभग 500 से 600 मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहते हैं और करीब 800 स्वास्थ्यकर्मी व कर्मचारी यहां कार्यरत हैं। मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की संख्या भी प्रतिदिन लगभग दो हजार रहती है। कुल मिलाकर अस्पताल परिसर में रोजाना 5,000 से 6,000 लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में यदि बेसमेंट की स्थिति के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।




