लखनऊ अग्निकांड से लिया सबक: ग्रेटर नोएडा में अब व्यावसायिक इमारतों का होगा फायर ऑडिट, प्राधिकरण ने कसी कमर

NCR Khabar News Desk
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लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट की व्यावसायिक इमारतों को सुरक्षित बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण ने शहर की सभी व्यावसायिक इमारतों का अनिवार्य ‘फायर ऑडिट’ कराने का निर्णय लिया है।

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इस अभियान की शुरुआत प्राधिकरण ने अपने खुद के मुख्यालय (KP-4) से की है। यह एक सराहनीय कदम है, क्योंकि यदि प्रशासन स्वयं सुरक्षित होगा, तभी वह दूसरों से सुरक्षा की अपेक्षा कर सकेगा। कार्यालय भवन के फायर ऑडिट के लिए प्राधिकरण ने अनुभवी एजेंसियों से कोटेशन आमंत्रित किए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 6 जुलाई तय की गई है।

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तीन टीमों का गठन, सख्त होगी निगरानी

प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस के आदेशानुसार, इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ओएसडी स्तर के अधिकारी करेंगे। ऑडिट के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो शहर की व्यावसायिक इमारतों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को परखेगी। वरिष्ठ प्रबंधक सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया है कि यह जांच नवीनतम अग्नि सुरक्षा मानकों और अधिनियमों के तहत ही की जाएगी।

क्या-क्या जाँचा जाएगा? फायर ऑडिट के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:

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भवन में लगे अग्निशमन उपकरण (Fire Extinguishers) की कार्यक्षमता।
फायर अलार्म सिस्टम की स्थिति।
आपातकालीन निकासी मार्ग (Emergency Exits) की उपलब्धता और सुगमता।
भवन में मौजूद अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन।

औपचारिकता न बने यह ऑडिट

लखनऊ की घटना ने हमें यह सिखाया है कि सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी लापरवाही भी कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन यह केवल कागजी कार्यवाही या खानापूर्ति बनकर नहीं रह जाना चाहिए।

अक्सर देखा जाता है कि ऑडिट की रिपोर्ट तैयार हो जाती है, लेकिन खामियों को दुरुस्त करने में बरसों निकल जाते हैं। प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑडिट के बाद जो रिपोर्ट आए, उस पर त्वरित और सख्त कार्रवाई हो। यदि कोई इमारत सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे तुरंत नोटिस दिए जाएं और जब तक सुधार न हो, तब तक उन पर सख्त नियंत्रण रखा जाए।

ग्रेटर नोएडा के निवासियों और यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उम्मीद है कि यह अभियान शहर को ‘अग्नि-सुरक्षित’ बनाने की दिशा में एक ठोस नींव साबित होगा।

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