लखनऊ डेस्क। गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सियासी घमासान तेज होता दिख रहा है। इस बार रणभूमि बनने जा रही है जेवर विधानसभा, जहां भाजपा के मजबूत दुर्ग को ढहाने के लिए सपा ने एक बड़ी योजना तैयार की है।
बिलासपुर में अखिलेश यादव की हुंकार
सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अक्टूबर 2026 में ग्रेटर नोएडा के बिलासपुर में एक विशाल रैली को संबोधित करने जा रहे हैं। यह रैली महज एक जनसभा नहीं, बल्कि भाजपा और जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह के लिए एक सीधी और कड़ी चुनौती मानी जा रही है। दरअसल 2022 में भाजपा के विरुद्ध बसपा और रालोद -समाजवादी गटबंधन और कांग्रेस के रूप में वोटो का अबंत्वारा हुआ था जिसके चलते धीरेन्द्र सिंह 50000 से अधिक वोट से जीत गए थे किन्तु अगर इन सभी दलों के वोटो को एक साथ लाया गया होता तो बीजेपी के लिए ये सीट जीतना मुश्किल हो सकता था I
समाजवादी पार्टी इस सीट पर इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है पीडीए के जरिये वो इस बार बसपा के दलित वोट को पहले ही साथ में ला चुकी है यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार सपा अपनी रणनीति में किसी भी प्रकार की चूक नहीं छोड़ना चाहती। दादरी में हुई पिछली चुनावी रैली के दौरान जिस तरह से भाजपा ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन का ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेलकर सपा की रैली के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश की थी, उससे सपा ने सबक लिया है। अब पार्टी ने बिलासपुर में अपनी पूरी ताकत झोंकने का मन बना लिया है।
क्या है सपा का ‘गेम प्लान’?
इस रैली में न केवल गौतम बुद्ध नगर, बल्कि गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेताओं के जुटने की संभावना है। अखिलेश यादव का स्वयं इस रैली में शामिल होना यह स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी जेवर सीट को कितनी गंभीरता से ले रही है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि सपा अध्यक्ष इस बार कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे, ताकि दादरी वाली गलतियों को दोहराया न जा सके। यह रैली यह भी दर्शाती है कि समाजवादी पार्टी अब भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों पर हमला बोलने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी सूत्रों की माने तो यहाँ किसी बड़े प्रभावशाली चेहरे को उतार कर चुनाव को मुश्किल बनाया जा सकता है बीते दिनों बीजेपी में कभी हाँ कभी ना वाली स्थिति में बने हुए पूर्व सांसद ब्रजभूषण सिंह की पुत्री शालिनी सिंह भी इसी क्षेत्र में एक्टिव हुई थी तब कहा गया था कि वो भी यहाँ से अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश कर रही है I सपा रणनीतिकारो का दावा है कि शालिनी सिंह को सपा ने अगर यहाँ उतार दिया तो यहाँ के ठाकुर, मुस्लिम के साथ नयी बस रहे शहरी वोटो को सपा में लाना आसान हो जाएगा बाकी पीडीए और बीजेपी विरोधी वोट तो पार्टी के पास है ही, जिससे इस औधोगिक क्षेत्र में सपा का खाता खुल सकता है।
क्या भाजपा और धीरेंद्र सिंह देंगे जवाब?
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह के लिए उनके ही घर में यह रैली एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, भाजपा खेमे से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इसे हल्के में नहीं लेगी।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या अखिलेश की इस रैली के जवाब में भाजपा कोई जवाबी रैली करेगी या ‘नोएडा एयरपोर्ट’ जैसे किसी बड़े विकास मॉडल के जरिए फिर से पलटवार करेगी?
‘अक्टूबर’ की जंग तय करेगी दिशा
आगामी अक्टूबर का महीना गौतम बुद्ध नगर के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम होने वाला है। एक तरफ समाजवादी पार्टी अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने और भाजपा को उनके ही घर में चुनौती देने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ भाजपा अपनी साख बचाए रखने के लिए प्रयासरत है। अब देखना यह होगा कि बिलासपुर की धरती पर अखिलेश यादव की यह हुंकार चुनावी समीकरणों को किस हद तक बदल पाती है।



