देवबंद। उत्तर प्रदेश की राजनीति में देवबंद विधानसभा क्षेत्र हमेशा से चर्चा का केंद्र रहा है, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही यहाँ भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान ने जिले की सियासत को गरमा दिया है। मंगलवार को देवबंद के औद्योगिक क्षेत्र में वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख ठाकुर अनिल सिंह पुंडीर के चुनावी कार्यालय के भव्य उद्घाटन ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनाव में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर जंग बेहद तीखी होने वाली है।
राघव लखनपाल के तीखे तेवर: हार का ठीकरा मंत्री के सिर
सहारनपुर के पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और सीधे तौर पर मंत्री बृजेश सिंह रावत पर निशाना साधा। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव की हार की टीस को सार्वजनिक करते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव में रणखंडी, भायला और मिरगपुर जैसे बड़े गाँवों में मुझे प्रचार के लिए नहीं ले जाया गया। यह जिम्मेदारी जिनकी थी (विधायक), उन्होंने इसे पूरा नहीं किया, जिसका परिणाम हार के रूप में सामने आया।”
शर्मा ने मंत्री का नाम लिए बिना उन पर ‘अहंकारी’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति यह घोषणा नहीं कर सकता कि वह अगले 35 सालों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा। लोकतंत्र में चुनाव क्षेत्र किसी की निजी रियासत नहीं होते। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अपील की कि जनता की भावनाओं को समझते हुए आगामी चुनाव में अनिल सिंह पुंडीर को मौका दिया जाए।
दिग्गजों का जमावड़ा: एकजुट हुआ ‘एंटी-बृजेश’ खेमा
अनिल सिंह पुंडीर, जो क्षेत्र के सबसे बड़े गाँव रणखंडी के निवासी हैं, के समर्थन में भाजपा के कई दिग्गज नेता एक मंच पर नज़र आए। उत्तर प्रदेश पिछड़ा आयोग के सदस्य चौधरी मेलाराम पंवार ने कहा कि यह कार्यालय जन समस्याओं के समाधान का केंद्र बनेगा और पूरी भाजपा अनिल पुंडीर के साथ खड़ी है।

इस अवसर पर गन्ना समिति के चेयरमैन चौधरी मनोज सिंह, नागल ब्लॉक प्रमुख चौधरी बृजेंद्र सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शशि त्यागी और भाजपा के वरिष्ठ नेता दीपक राज सिंघल सहित त्यागी-ब्राह्मण और राजपूत समुदाय के कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। हजारों की भीड़ ने यह संकेत दे दिया है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर भी जड़ें जमा चुकी है।
मिशन 2027 के लिए खतरे की घंटी?
अनुशासित मानी जाने वाली भाजपा के लिए सार्वजनिक मंच से एक मंत्री के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी पार्टी आलाकमान के लिए चिंता का विषय हो सकती है। हाल ही में नवाब सिंह नागर को मेरठ का क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, उनके सामने अब इस गुटबाजी को रोकने की बड़ी चुनौती होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर सीटों पर भाजपा की हार की मुख्य वजह यही ‘भीतरघात’ और स्थानीय प्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी थी। यदि पार्टी नेतृत्व ने देवबंद में बढ़ते इस असंतोष को समय रहते नियंत्रित नहीं किया, तो ‘मिशन 2027’ की राह कठिन हो सकती है।
फिलहाल, अनिल सिंह पुंडीर के कार्यालय उद्घाटन ने मंत्री बृजेश रावत के खेमे में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि पार्टी हाईकमान इस ‘बगावत’ पर क्या रुख अपनाता है—इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा या क्षेत्र में बदलाव की आहट?



