लखनऊ। अखिलेश यादव के जन्मदिन से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक कमाल अख्तर ने विधानसभा के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।
अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कमाल अख्तर ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देशानुसार लिया गया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का समय-समय पर बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने डेढ़ साल तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया है और अब पार्टी किसी अन्य नेता को यह दायित्व सौंपेगी। अख्तर ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास और आगामी चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित रहेगा।
आंतरिक गुटबाजी और रुचि वीरा के साथ विवाद की चर्चाएं
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कमाल अख्तर का इस्तीफा महज एक संगठनात्मक बदलाव नहीं है। बीते कुछ समय से मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच तल्खी जगजाहिर रही है। दोनों नेताओं के समर्थकों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में एक-दूसरे की तस्वीरों का न होना इसका स्पष्ट संकेत माना जाता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय राजनीति में दोनों नेताओं के धड़े अलग-अलग माने जाते हैं। रुचि वीरा को आजम खान खेमे का करीबी माना जाता है, जबकि कमाल अख्तर पूर्व सांसद एसटी हसन गुट के समर्थक माने जाते हैं। इस अंतर्कलह को देखते हुए हाल ही में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को लखनऊ तलब किया था, जहां उन्हें अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी गई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विपक्ष का हमला कमाल
अख्तर के इस इस्तीफे पर विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने सपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने सांसद रुचि वीरा के दबाव में मुख्य सचेतक को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने सपा पर अपने मुस्लिम नेताओं को अपमानित करने का आरोप लगाया है।
अब आगे क्या?
जुलाई 2024 में मनोज पांडे के स्थान पर मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी संभालने वाले कमाल अख्तर के हटने के बाद, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी किसे नया मुख्य सचेतक नियुक्त करती है। यह नियुक्ति न केवल पार्टी के भीतर प्रशासनिक संतुलन को दर्शाएगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि मुरादाबाद की स्थानीय राजनीति में सपा का आगामी रुख क्या होगा।
फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि पार्टी आगामी उपचुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन में और भी बड़े फेरबदल कर सकती है ताकि गुटबाजी पर लगाम लगाई जा सके।



