स्थानीय निवासियों को प्रदूषण से राहत दिलाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शक्तियों में इजाफा करते हुए उसे न केवल जुर्माना लगाने, बल्कि उसकी सीधे वसूली करने का अधिकार भी दे दिया है। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) अब प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई कर सकेगा। वहीं, आगामी दिनों में प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत? (9 वर्षों में 35 करोड़ की वसूली अटकी)
दरअसल, पिछले वर्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुर्माना वसूलने का अधिकार वापस ले लिया गया था। इस कारण एक अव्यवहारिक स्थिति पैदा हो गई थी—बोर्ड नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना तो लगा सकता था, लेकिन उसकी वसूली के लिए उसे नोएडा प्राधिकरण जैसी अन्य स्थानीय संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।
इस दोहरी व्यवस्था और सुस्त प्रक्रिया का असर यह हुआ कि पिछले नौ वर्षों में बोर्ड करीब 35 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली नहीं कर सका। वसूली न होने के कारण प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण एजेंसियों और उद्योगों के मन से कार्रवाई का डर खत्म हो गया था और प्रदूषण नियंत्रण की मुहिम सुस्त पड़ गई थी।
अब क्या बदलेगा?
सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के बाद अब जुर्माना लगाने और उसे वसूलने, दोनों की जिम्मेदारी सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी। इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर बदलाव देखने को मिलेंगे। अब जुर्माना वसूलने के लिए किसी अन्य विभाग की कागजी कार्रवाई का इंतजार नहीं करना होगा। पिछले कई वर्षों से अटके 35 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली के मामलों में अब तेजी आने की उम्मीद है। धूल उड़ाने वाली निर्माण एजेंसियों, नियमों ताक पर रखकर चलने वाले उद्योगों और कचरा जलाने वाली संस्थाओं पर अब तत्काल कार्रवाई होगी।





