कभी-कभी जीवन एकदम फिल्मी हो जाता है । अक्सर फिल्मों में हीरो हीरोइन के मिलने या बिछड़ने का स्थान बनने वाला एयरपोर्ट हम सभी के आकर्षण और चर्चा का केंद्र रहता ही है। मामला अगर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का हो तो चर्चाएं और भी बढ़ जाती है। लंबे इंतजार के बाद भी नवी मुंबई जैसे कई बड़े एयरपोर्ट से कम समय में शुरू होने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सामना जब पहले मानसून की जबरदस्त बारिश से हुआ, तो एयरपोर्ट से निकलने वाले अंडरपास में पानी भरने के वीडियो फिल्म में तैरने लगे पानी भरने के वीडियो सामने आए।
फिर क्या था, सोशल मीडिया पर इसको लेकर तमाम बातें शुरू हो गई। जितनी मुंह उतनी बातें, पत्रकारों से लेकर नेताओं तक किसी ने मौका नहीं चुका। क्या अखिलेश यादव क्या राहुल गांधी सब ने मौके पर चौका लगा दिया । जाहिर सी बात है जिस एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार अपनी उपलब्धि बताने जा रही है उसमें अगर कोई ऐसा काम हो जाए तो उसको लेकर सवाल क्यों नहीं उठे?
सवाल उठे तो जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह कैसे चुप रहते, धीरेंद्र सिंह ने बाकायदा एअरपोर्ट पर उसी स्थल पर जाकर विडियो बनाते हुए ऐसे कथित कुंठित लोगों को लताड़ लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने कभी एयरपोर्ट के लिए एक भी अच्छा शब्द नहीं लिखा उन्होंने मौका मिलते ही एयरपोर्ट के बारे में बुरा कहना शुरू कर दिया । बात तो कुछ हद तक उनकी भी सही है कि बुरा कहने वालों, कभी तो कुछ अच्छा भी तो कहें।
लेकिन बुरा कहने वालों ने कहा कि अच्छे काम करने के लिए ही तो विधायक जी आपको चुना गया था इसीलिए तो आपको दो बार से जनता वोट दे रहे थे। दो बार से जनता वोट देने के बाद जो एयरपोर्ट निकाल कर आया अगर उसमें पहले ही मानसून की बारिश में पानी भरने लगे और उसे साफ करने में आधा घंटा लगे तो जेवर के जिस विकास का दावा कर रहे हैं उसकी हवा तो निकल ही जानी है । अब चुनावी साल में लोग राजनीति भी ना करें, सोशल मीडिया पर आपके बने एयरपोर्ट पर कमियां सामने आने पर कुछ भी न कहें, ऐसा कैसे हो सकता है?

विधायक जी सामने ऐसे प्रश्न दुविधा तो हैं ही और हद तो ये भी है कि यह बेशर्म और कुंठित लोग 30 वर्ष पूर्व आयी शाहरुख खान की फिल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” के डायलॉग “बड़े-बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं, सेनोरिटा” जैसे डायलोग जानते भी तो नहीं हैI तब तो ये जेन G पैदा भी नहीं हुए थे, न इन्हें सिविक सेन्स का पता न ही देश के प्रति कर्तव्यो का, ये तो जानते भी नहीं कि ऐसी समस्याओ पर सोशल मीडिया ट्रोलिंग इनको कितना गिरा हुआ तय कर सकती है, क्या पता कल को देशद्रोही साबित हो जाये ?
पर क्या विधायक और सरकार दोनों का भी यह दृष्टिकोण सही है? क्या किसी भी संस्थान में गुणवत्ता के मानक को ऐसे ही बयानों से सही ठहराया जा सकता है ।अगर विधायक जी का और अनुसरण कोई रेस्टोरेंट वाला कर ले तो कल को वह भी यही रहेगा कि हमने तो अच्छा खाना परोसा था मगर कुछ कुंठित लोगों ने उसमें कीड़ा निकाल के हमें बदनाम करने का काम कर दिया है, लोगों को कुंठित, उनके आक्रोश को बदनाम करने का कारण बताकर सत्ता मुंह तो बंद कर सकते हैं किंतु उससे गुणवत्ता में गिरावट को रोकना जाना असंभव है, उसके आगे सत्ता हो या व्यापार, सबका पतन तभी से शुरू भी हो जाता है।



