28 मार्च को हुए उद्घाटन के बाद अपनी पहली मानसूनी बारिश का सामना कर रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आई हैं। भारी बारिश के बाद एयरपोर्ट के निकास द्वार पर स्थित अंडरपास में कई फीट तक पानी भर गया, जिससे यह पूरा इलाका किसी ‘वॉटर पार्क’ जैसा नजर आने लगा। इस जलभराव के कारण यात्रियों और वहां मौजूद कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पार्किंग की ओर जाने वाला मुख्य रास्ता हुआ जलमग्न
नोएडा एयरपोर्ट पर बना यह अंडरपास एक महत्वपूर्ण लिंक है, जो एयरपोर्ट के फोरकोर्ट (मुख्य परिसर) को पार्किंग एरिया से जोड़ता है। एयरपोर्ट से बाहर निकलने वाले यात्री इसी रास्ते के जरिए अपनी गाड़ियों या टैक्सी तक पहुँचते हैं। बारिश के बाद इस रास्ते में इतना पानी जमा हो गया कि लोगों का वहां से निकलना दुभर हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, इंजीनियरिंग पर सवाल
अंडरपास में हुए इस भारी जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स एयरपोर्ट की अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं और ड्रेनेज (जल निकासी) सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआती बारिश में ही देश के इतने बड़े और आधुनिक प्रोजेक्ट का यह हाल है, तो मानसून की भारी बारिश में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
प्रबंधन की सफाई: 30 मिनट में साफ किया गया पानी
इस पूरे मामले पर यमुना प्राधिकरण, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एयरपोर्ट बनवाने का श्रेय लेने में सबसे आगे रहे जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एयरपोर्ट प्रबंधन ने अनौपचारिक रूप से स्पष्ट किया है कि यह जलभराव अचानक हुई अत्यधिक बारिश के कारण हुआ था। प्रबंधन का दावा है कि उनकी टीमों ने तत्काल कार्रवाई की और महज 30 मिनट के भीतर अंडरपास से पानी निकाल दिया गया। प्रबंधन ने यह भी साफ किया कि इस घटना से एयरपोर्ट के अन्य कार्यों या भविष्य के विमान संचालन की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के परिसर में जलभराव होना इंजीनियरिंग की खामी को दर्शाता है। आने वाले समय में जब एयरपोर्ट पूरी तरह संचालित होगा, तब ऐसी स्थिति यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी और सुरक्षा का कारण बन सकती है। फिलहाल, इस घटना ने प्रशासन को ड्रेनेज सिस्टम की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।



