औद्योगिक क्रांति की ओर ओडिशा: 8 अगस्त को मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा में मेगा इन्वेस्टमेंट आउटरीच, उच्च मूल्य वाले निवेश पर ध्यान

NCR Khabar Internet Desk
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ग्रेटर नोएडा/भुवनेश्वर। अपने औद्योगिक परिदृश्य को केवल खनिज निष्कर्षण (mining) से आगे बढ़ाकर ‘उच्च मूल्य वाले विनिर्माण’ (high-value manufacturing) का केंद्र बनाने की दिशा में ओडिशा सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत कदम उठाया है। राज्य में आर्थिक प्राथमिकताओं को नया आयाम देते हुए, मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी 8 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में एक उच्च स्तरीय ‘निवेश संपर्क कार्यक्रम’ (Investment Outreach Program) और रोड शो का नेतृत्व करेंगे।

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इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता ‘ओडिशा फूड प्रो 2026’ होगी, जो 7 अगस्त को नई दिल्ली में एसोचैम के सहयोग से आयोजित की जाएगी। इस विशेष रोड शो में ओडिशा की कृषि और समुद्री संपदा, खाद्य प्रसंस्करण तंत्र, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, सरकारी नीतियां और खेत से बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला में उपलब्ध निवेश अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा।

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इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में ओडिशा के उद्योग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री संपद चंद्र स्वैन के साथ राज्य प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। पेशेवर जगत और उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, ओडिशा का यह कदम केवल पारंपरिक रोड शो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है—जहाँ ध्यान अब ‘कच्चे माल’ के बजाय ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्यवर्धन) पर केंद्रित है।

संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से ‘वैल्यू-एडिशन’ की ओर बदलाव

ओडिशा लंबे समय से भारत का धातु और खनन पावरहाउस रहा है। हालांकि, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस खनिज आधार का उपयोग करके एक मजबूत डाउनस्ट्रीम (अनुप्रवाह) और एमएसएमई (SME) पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के नेतृत्व में यह पहल दिखाती है कि नई सरकार औद्योगिक विकास के अगले चरण के लिए आक्रामक रूप से तैयार है।

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इस आउटरीच का प्राथमिक उद्देश्य अग्रणी औद्योगिक घरानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, अनुप्रवाह इकाइयों और व्यावसायिक संघों को ओडिशा के इस नए औद्योगिक रोडमैप का हिस्सा बनने के लिए आकर्षित करना है।

8 अगस्त का कार्यक्रम: विनिर्माण सुविधा का दौरा और रणनीतिक मंथन

निवेश संपर्क कार्यक्रम की रूपरेखा को काफी व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख (result-oriented) बनाया गया है:

उन्नत विनिर्माण सुविधा का अध्ययन: 8 अगस्त की शुरुआत प्रतिनिधिमंडल द्वारा ग्रेटर नोएडा में स्थित एक अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र के दौरे से होगी। इसका उद्देश्य उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू और उपभोक्ता उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं को समझना और राज्य में ऐसे उद्योगों के लिए साझेदारी की संभावनाएं तलाशना है।

तीन केंद्रित गोलमेज सम्मेलन (Sector-Specific Roundtables)

संयांत्र दौरे के बाद, प्रतिनिधिमंडल तीन विशिष्ट गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेगा, जो ओडिशा के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर आधारित हैं:

एल्युमीनियम डाउनस्ट्रीम और इंजीनियरिंग अनुप्रयोग: ओडिशा में देश का सबसे बड़ा एल्युमीनियम भंडार है। पहली गोलमेज बैठक में अग्रणी डाउनस्ट्रीम कंपनियों को एक साथ लाया जाएगा ताकि प्राथमिक धातु को उच्च मूल्य वाले घटकों, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स और इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों में बदलने पर चर्चा की जा सके।

कपड़ा, परिधान और तकनीकी वस्त्र (Textiles & Apparel): दूसरी बैठक में ओडिशा के उभरते वस्त्र और परिधान पारिस्थिति का प्रदर्शन किया जाएगा। राज्य के पास कुशल कार्यबल का एक विशाल पूल, बुनियादी ढांचा और अनुकूल नीतियां हैं। सरकार का लक्ष्य श्रम-गहन (labour-intensive) उद्योगों को आकर्षित करना है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकें।

इंजीनियरिंग, पूंजीगत वस्तुएं और एमएसएमई इकोसिस्टम: तीसरी गोलमेज बैठक एमएसएमई और इंजीनियरिंग निर्माताओं के लिए होगी। इसमें ओडिशा के विशाल धातु, बिजली और खनन आधार का उपयोग करके औद्योगिक उपकरण, निर्माण सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा उपकरण (Clean Energy Equipment) और एक मजबूत स्थानीय ‘वेंडर एवं सप्लायर नेटवर्क’ स्थापित करने पर चर्चा होगी।

पेशेवरों और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?

राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से, ओडिशा का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में यह आउटरीच यह दर्शाता है कि राज्य अब केवल पूर्वी भारत के औद्योगिक नक्शे तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि राष्ट्रीय सप्लाई चेन में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।

पेशेवरों और कॉर्पोरेट जगत के लिए संदेश स्पष्ट है कि ओडिशा अब केवल भारी उद्योगों का गंतव्य नहीं है, बल्कि यह कुशल कार्यबल, मजबूत नीतिगत समर्थन और तैयार बुनियादी ढांचे के साथ डाउनस्ट्रीम विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक-संचालित क्षेत्रों में उच्च-मूल्य निवेश के लिए दरवाजे खोल रहा है। यदि राज्य सरकार इन चर्चाओं को ठोस निवेश प्रस्तावों में बदलने में सफल रहती है, तो यह ओडिशा के औद्योगिक भविष्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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