सत्ता के गलियारों से : नोएडा में क्विक कॉमर्स के लोगो से बाइक हटाने को कहना एक अध्यक्ष को पड़ा भारी, क्यूँ राकेश टिकैत के आन्दोलन पर प्राधिकरणों के समर्पण से दुखी है नोएडा के किसान नेता और जानिये क्यूँ मुख्यमंत्री आगमन के कायर्क्रम में पत्रकारों को बुलाने पर संशय में है सुचना विभाग!

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। सत्ता के गलियारों में पहला समाचार इस बार नोएडा से है, जानकारी के अनुसार शहर के सेक्टरो में कभी लोगो की सहायता के लिए बनाये गये आरडब्ल्यूए इन दिनों वसूली के नए चेहरे बन चुके हैंI बारात घरो की बुकिंग से लेकर दुकानदारों और सेक्टर में सामान बेचने आने वालों से लेकर कबाड़ियों तक से वैध और अवैध दोनों तरीके की वसूलियां होती रहती हैं। कहा जाता है इसी वैध और अवैध वसूली के लिए नोएडा के सेक्टर में आरडब्ल्यूए अध्यक्ष बनने के लिए खूब दांव आजमाये जाते हैं। कभी कहीं कोई सही अध्यक्ष आ भी जाए तो बने-बनाये अध्यक्ष के खिलाफ माहौल बनाकर ऐसे खिलाडियों द्वारा अपने ही किसी अनुज को अध्यक्ष बना दिया जाया जाता है। इसी क्रम में नोएडा के दिल्ली से लगे एक सेक्टर का मामला इन दिनों खूब चर्चा में बताया जा रहा है कि सेक्टर के अध्यक्ष एक दिन सेक्टर के वीरान पड़े एक मार्केट में आँख मिचौली वाली क्विक कॉमर्स (Quick Commerce या Q-Commerce) सामान बेचने वाली कंपनी के वेयरहाउस के पास पहुंच गए। वेयर हाउस के बाहर आंख मिचौली करने वाली इस कंपनी के राइडर्स की बाइक खड़ी होती है। बस फिर क्या था अध्यक्ष जी को ताव आ गया और उन्होंने पूछना शुरू कर दिया, यह बाइक यहां क्यों खड़ी है। बाइक वाले लड़कों ने कहा कि वेयरहाउस ने चार दुकान किराए पर ले रखी है तो उसके आगे ही बाइक तो खड़ी होंगी, मार्केट में कहीं और पार्किंग का प्रावधान तो है नहीं। मगर अध्यक्ष जी अपने अध्यक्ष होने के गुमान में थे वह भूल गए कि यह बाइक राइडर उनके सेक्टर के पढ़े लिखे लोग नहीं है जो उनके धमकाने में आ जाएंगे। बस फिर क्या था बाइक राइडरो ने उनको मैनेजर से बात करने के बहाने ले अंदर जाकर उनकी भरपूर खातिरदारी की। अंदर से आ रही आवाजों को सुनकर उनके साथ गए बाकी कमेटी के सदस्य गधे के सर सींग की तरह गायब हो गए। इस घटना की ना तो कोई शिकायत पुलिस थाने में की जा रही है, ना ही अध्यक्ष जी किसी से कुछ कह रहे हैं हां झुंडपुरा से लेकर उनकी मरहम पट्टी करने वाले पास के अस्पताल तक इसकी चर्चाएं खूब हो रही है । अस्पताल वाले पट्टी तो कर रहे हैं पर कह रहे हैं ठीक हुआ इसने हमसे भी सेक्टर में गेट लगाने के नाम पर खूब उगाही की है।

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सत्ता के गलियारों में अगला समाचार बीते दिनों राकेश टिकैत के तीनों प्राधिकरण में आकर आंदोलन करने और प्राधिकरण के अधिकारियों से बात मनवा कर चले जाने के बाद नोएडा के किसान संगठनों में मची खलबली को लेकर है । असल में नोएडा में कथित किसानों का ठेका अब तक कुछ खास ही नेता लेते रहे हैं और वही प्राधिकरण में जाकर अधिकारियों पर दबाव बना कर आबादी में अवैध निर्माण और अपने 5 परसेंट के प्लाट के खेल साधते रहे हैं। कई लोग तो इनमे “हसीना मान जायेगी” फिल्म में परेश रावल के डायलोग “चाचा ही भतीजा है” भी कहते सुनाई देते है। पर इन स्थानीय किसान नेताओ में चल रही अफवाहों को माने तो राकेश टिकैत ने इस बार आन्दोलन के बहाने किसानो की मांगो के साथ साथ धीरे से बीते दिनों नोएडा प्राधिकरण द्वारा तोड़े गए एक मॉल और आबादी में बनी अन्य अवैध बिल्डिंग के लिए सौदेबाजी करने की भी कोशिश की थी, हालांकि प्राधिकरण के अधिकारियों ने भू माफियाओं को लेकर किसी भी तरीके की सौदेबाजी पर ना कर दी है। फिर भी जैसे ही ये अफवाहे प्राधिकरण से बाहर आई, नोएडा के किसान नेताओं की नींद उड़ गई है उन्हें लगने लगा है कि अगर राकेश टिकैत नोएडा के ऐसे मामलों भी में इतना डीप इंटरेस्ट लेने लगेंगे तो यहां उनकी राजनीति और धंधा, दोनों समाप्त हो जाना तय है। फिर उनका क्या होगा? अब सच क्या है ये हम नहीं जानते, इसका राज तो राकेश टिकैत के साथ ही चला गया है।

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सत्ता के गलियारों में तीसरा समाचार लखनऊ में पत्रकार कांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रेटर नोएडा आगमन लेकर है । दरअसल मुख्यमंत्री रविवार को गौतम बुद्ध नगर यूनिवर्सिटी में प्रेरणा के कार्यक्रम में आ रहे हैं । इस कार्यक्रम को लेकर पहले से कई विवादों में घिरी डीएम से लेकर कमिश्नर अलर्ट पर है, लगातार वहां की जानकारी ले रही हैं। ऐसे में जानकारों की माने तो एलआईयु से लेकर सूचना विभाग की नींद उड़ी हुई है। सूचना विभाग लखनऊ वाली स्थिति को दोहराने से बचना चाहता है, इसलिए इस बार सिर्फ उन्हें पत्रकारों को फोन करके मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए पास दिए जा रहे हैं जिनसे यह उम्मीद है कि वह कुछ नहीं पूछेंगे। उधर पत्रकार भी इस बार मुख्यमंत्री के दौरे में जाने से बचना चाह रहे है कि क्यूँ जांच के नाम पर अपना सम्मान दांव पर लगाया जाएI चुनावी दौर में नेताओं से प्रश्न पूछने का समय पत्रकारों के लिए भी नहीं रह गया है। यहां के पत्रकारों को भी पता है कि जो नेता कह रहे हैं उसको वैसे ही लिखना है ऐसे में वहां जाकर कर अपनी एनर्जी और इज्जत क्यों दांव पर लगाई जाए । हां कोई फिर से कहीं कोई नया उत्पाती पत्रकार ऐसी हरकत ना कर दे बस इसी को लेकर सब मौन धारण किये हुए हैं।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे