लखनऊ डेस्क। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को समाप्त करने सम्बंधी समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हालिया बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में ज़बानी जंग तेज हो गई है। सरोजनी नगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए उनके कार्यकाल के दौरान रियल एस्टेट और अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं में हुई कथित वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म x पर विधायक राजेश्वर सिंह ने कहा कि संस्थाओं को समाप्त करने की बात कहने से पूर्ववर्ती सरकार अपने कार्यकाल की प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल के दौरान एलडीए जनहित के नियामक के रूप में कार्य करने के बजाय प्रभावशाली बिल्डरों के हितों को प्राथमिकता देता रहा।
अंसल-सुशांत गोल्फ सिटी और होमबायर्स का संकट
रियल एस्टेट क्षेत्र की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए राजेश्वर सिंह ने ‘अंसल-सुशांत गोल्फ सिटी’ परियोजना में एलडीए, राजस्व और निबंधन (रजिस्ट्रेशन) विभागों की भूमिका पर सवाल उठाए।
बंधक भूखंडों की बिक्री: प्रारंभिक जांच और वित्तीय विवरणों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कुल 3,489 बंधक (mortgaged) भूखंडों में से लगभग 2,747 भूखंडों की अवैध रूप से रजिस्ट्री कर दी गई।
जांच और एफआईआर: लगभग 411 एकड़ बंधक भूमि जांच के दायरे में आई, और जून 2025 तक अंसल समूह से संबंधित मामलों में दर्ज प्राथमिकी (FIRs) की संख्या बढ़कर 224 तक पहुंच गई थी।
ग्राहकों पर प्रभाव: विधायक ने कहा कि नियामक संस्थाओं की लापरवाही के कारण हजारों होमबायर्स को अपनी जीवनभर की पूंजी फंसाकर पजेशन, रजिस्ट्री और मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों भटकना पड़ा।
जेपीएनआईसी और गोमती रिवरफ्रंट: लागत में वृद्धि और अधूरी परियोजनाएं
राजेश्वर सिंह ने सपा सरकार के समय शुरू की गई दो प्रमुख सार्वजनिक परियोजनाओं—जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPNIC) और गोमती रिवरफ्रंट—में वित्तीय प्रबंधन पर भी विस्तृत तथ्य प्रस्तुत किए।
- जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPNIC):
लागत में वृद्धि: परियोजना की लागत प्रारंभिक अनुमानों से कई गुना बढ़कर लगभग ₹821 करोड़ तक पहुंच गई, फिर भी कार्य अधूरा रहा।
लीज का प्रस्ताव: उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में सैकड़ों करोड़ रुपये की इस सार्वजनिक संपत्ति को मात्र ₹3 करोड़ वार्षिक के मूल्य पर एक निजी एजेंसी को सौंपने की योजना बनाई गई थी, जिसके नियम व शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई थीं।
वर्तमान मॉडल से तुलना: उन्होंने वर्तमान व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि अब ओपन ग्लोबल टेंडर के माध्यम से चुने गए ऑपरेटर को शेष ₹200–250 करोड़ का कार्य अपने खर्च पर पूरा करना होगा, ₹25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी देनी होगी और एलडीए को ₹6 करोड़ वार्षिक (5% वार्षिक वृद्धि के साथ) का भुगतान करना होगा। - गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट:
बजट में उछाल: विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, लगभग ₹167 करोड़ की प्रारंभिक लागत से शुरू हुई यह परियोजना लगभग ₹1,400 करोड़ खर्च होने के बाद भी अधूरी रही।
प्रशासनिक खामियां: सिंह ने आरोप लगाया कि नदी को प्रदूषण और सीवेज से मुक्त करने के मूल उद्देश्य के बजाय दिखावटी निर्माण को प्राथमिकता दी गई, जो वर्तमान में जांच का विषय है।
विकास मॉडल और संस्थागत सुधार पर बहस
पूर्ववर्ती सरकार के विकास मॉडल की आलोचना करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि घोषणाओं, लागत में कई गुना वृद्धि, और अधूरी परियोजनाओं के कारण लखनऊ की जनता को भारी वित्तीय और व्यावहारिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि संस्थाएं स्वयं खराब नहीं होतीं, बल्कि “राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और बिल्डर-नौकरशाही का गठजोड़” उन्हें कमजोर करता है।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार पूर्ववर्ती प्रणाली की विसंगतियों को सुधारने का प्रयास कर रही है। इसके तहत होमबायर्स के हितों की रक्षा, बंधक भूखंडों की पारदर्शी जांच, कानूनी कार्रवाई तथा वर्षों से लंबित पड़ी परियोजनाओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजधानी के विकास और शहरी नियोजन को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इन विशिष्ट आंकड़ों और आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।




