नोएडा। नोएडा के सेक्टर-16 में स्थित प्रतिष्ठित वर्ल्ड ट्रेड टावर (डब्ल्यूटीटी) के भूखंड आवंटन की जांच प्रक्रिया तेज हो गई है। बुधवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम ने नोएडा प्राधिकरण कार्यालय का दौरा किया और आवंटन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। प्राधिकरण के अधिकारियों ने जांच टीम को आवंटन से जुड़े सभी आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए हैं। इस मामले में अब रंगदारी और फर्जीवाड़े के आरोप भी जुड़ गए हैं।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने बताया कि इस जांच में प्राधिकरण की पूरी टीम पुलिस का सहयोग कर रही है और मांगे गए सभी दस्तावेज सौंप दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा प्रकरण सेक्टर-16 के भूखंड संख्या सी-01 के आवंटन से संबंधित है। लगभग 14 हजार वर्गमीटर के इस भूखंड का आवंटन मार्च 2010 में एक कंसोर्टियम के पक्ष में किया गया था, जिसके बाद अगस्त 2010 में इसकी लीज डीड की गई थी।
हाल ही में, इसी कंसोर्टियम से जुड़े एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूखंड आवंटन के दौरान फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, मामले में रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इसी शिकायत को आधार बनाकर दिल्ली पुलिस मामले की व्यापक जांच कर रही है।

दिल्ली पुलिस की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि वर्ष 2010 में भूखंड का आवंटन किस प्रक्रिया के तहत किया गया था, कंसोर्टियम में कौन-कौन लोग शामिल थे और आवंटन के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक थे या नहीं। प्राधिकरण की ओर से पुलिस को आवंटन पत्र, कंसोर्टियम के मूल दस्तावेज और लीज डीड सौंपे गए हैं। इसके साथ ही, प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी भी अपने स्तर पर इन फाइलों और आवंटन प्रक्रिया का आंतरिक परीक्षण कर रहे हैं।
पहले से चल रही है ईडी और सीबीआई की जांच
वर्ल्ड ट्रेड टावर का मामला पहले से ही विवादों में रहा है। इसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियां पहले से ही जांच कर रही हैं। अब दिल्ली पुलिस की इस नई जांच से इस मामले में शामिल पक्षों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
पूरी तरह कार्यशील है बहुमंजिला इमारत
वर्तमान में सेक्टर-16 स्थित वर्ल्ड ट्रेड टावर (डब्ल्यूटीटी) नोएडा के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। इस इमारत में लगभग छह पोडियम और 22 तल हैं, जहां विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के कार्यालय पूरी तरह से संचालित हो रहे हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यदि दस्तावेजों के परीक्षण में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कंसोर्टियम के सदस्यों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



