ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) में पिछले दो दिनों से चला आ रहा तकनीकी सुपरवाइजरों और सुपरवाइजरों का धरना मंगलवार शाम समाप्त हो गया। प्राधिकरण प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद सहमति बनी, जिसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन वापस लेने और नियमित कार्य पर लौटने का निर्णय लिया।
सकारात्मक वार्ता के बाद बनी सहमति धरना समाप्त कराने के लिए प्राधिकरण के उप महाप्रबंधक (डीजीएम) विजय रावल, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एम्प्लॉय एसोसिएशन के अध्यक्ष सोनू भड़ाना ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। वार्ता के दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी न्यायोचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एन.जी. रवि कुमार भी कर्मचारियों की समस्याओं के न्यायसंगत समाधान के पक्षधर हैं।
प्रबंधन ने शहर के विकास कार्यों और आम जनता की सुविधाओं की निरंतरता का हवाला देते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की, जिसे कर्मचारियों ने स्वीकार कर लिया।
वार्ता के संबंध में डीजीएम विजय रावल ने कहा, “प्राधिकरण हमेशा अपने कर्मचारियों की उचित मांगों के प्रति संवेदनशील रहा है। कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बेहतर संवाद के माध्यम से एक सकारात्मक समाधान निकाला गया है। हमारा प्राथमिक लक्ष्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए शहर के विकास कार्यों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाना है।”

क्या था विवाद का कारण?
इस विवाद की शुरुआत कलाधाम सोसाइटी में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद हुई, जहां नलकूप की बोरिंग के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में डूबने से छह वर्षीय बालक की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के उपरांत प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) एके सिंह ने एक आदेश जारी कर कार्यस्थल पर किसी भी दुर्घटना के लिए सीधे तौर पर तकनीकी सुपरवाइजर और सुपरवाइजर की जवाबदेही तय कर दी थी। इसके आधार पर पुलिस द्वारा संबंधित तकनीकी सुपरवाइजर और सुपरवाइजर की गिरफ्तारी की गई थी।
इस आदेश के विरोध में अस्थायी व संविदा कर्मचारी सोमवार से दफ्तर के कामकाज का बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे। कर्मचारियों का तर्क था कि जब उन्हें प्रशासनिक या वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं, तो केवल उन पर शत-प्रतिशत जवाबदेही डालना अनुचित है। यद्यपि प्राधिकरण ने बाद में आदेश में संशोधन किया था, लेकिन कर्मचारी पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। सोमवार और मंगलवार को काम बंद रहने से परियोजना और उद्यान विभाग का परिचालन प्रभावित हुआ था।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने निम्नलिखित मांगें रखी थीं:
- जेल में बंद निर्दोष तकनीकी सुपरवाइजर और सुपरवाइजर की रिहाई के लिए प्राधिकरण द्वारा कानूनी व प्रशासनिक सहयोग।
- हाल ही में सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की पुनर्बहाली।
- अस्थायी कर्मचारियों को आधिकारिक पहचान-पत्र और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना।
- कार्य के दौरान दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों के लिए बीमा सुरक्षा और उचित मुआवजे का प्रावधान।
- अधिकारों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट और व्यावहारिक संतुलन।
- नोएडा प्राधिकरण की तर्ज पर समान वेतन वृद्धि लागू करना।
प्राधिकरण प्रबंधन द्वारा इन मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करने के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है, जिससे शहर में विकास व रखरखाव संबंधी कार्य पुनः सामान्य गति से शुरू होने की उम्मीद है।



