नोएडा। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर नोएडा महानगर में समाजवादी पार्टी (सपा) की संगठनात्मक तैयारियों का सच बुधवार को उजागर हो गया। अवसर था समाजवादी आंदोलन के प्रखर चिंतक और ‘छोटे लोहिया’ के नाम से विख्यात स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र की 93वीं जयंती का। सेक्टर-33 स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित इस कार्यक्रम और महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता की अध्यक्षता में हुई मासिक समीक्षा बैठक के दौरान पार्टी की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सतह पर आ गई।
बैठक में ‘छोटे लोहिया’ के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके विचारों को याद किया गया। हालांकि, इस औपचारिक कार्यक्रम के समानांतर जो राजनीतिक घटनाक्रम घटा, उसने स्पष्ट कर दिया कि नोएडा सपा इस समय चार मजबूत धड़ों में बंट चुकी है।
चार गुटों में उलझी संगठन की डोर
नोएडा में समाजवादी पार्टी को पारंपरिक रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि (यादव और गुर्जर) की राजनीति से बाहर निकालने की कोशिशें लंबे समय से चल रही हैं। इसी कड़ी में पंजाबी समाज से आने वाले पूर्व अध्यक्ष दीपक विग के सफल कार्यकाल के बाद दुसरे सवर्ण और शहरी चेहरे के रूप में डॉ. आश्रय गुप्ता को महानगर अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। लेकिन अब स्थानीय गुटबाजी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
पार्टी सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में पार्टी नोएडा में चार प्रमुख गुटों में विभाजित नजर आ रही है:

- पारंपरिक यादव गुट
- स्थानीय गुर्जर गुट
- बबलू चौहान के नेतृत्व में उभरता नया क्षत्रिय गुट
- सवर्ण एवं शहरी मतदाता गुट
बुधवार को लखनऊ से आए पर्यवेक्षकों के सामने ही अंतर्विरोध चरम पर पहुंच गया। पार्टी के दो सबसे प्रभावशाली—यादव और गुर्जर—गुटों ने दोटूक शब्दों में पर्यवेक्षकों से कह दिया कि वे अपने क्षेत्र के बूथों का प्रबंधन स्वयं देख लेंगे और अध्यक्ष को अन्य क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, क्षत्रिय नेता बबलू चौहान के नेतृत्व वाले गुट ने महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता के नेतृत्व को सीधी चुनौती दे डाली।
784 बूथों का प्रबंधन और ‘PDA’ फार्मूले का संकट
इस खींचतान के बीच नोएडा विधानसभा क्षेत्र के 784 बूथों पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने का लक्ष्य अधर में लटकता दिख रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले में ‘पी’ का अर्थ ‘पंडित’ (ब्राह्मण) बताकर सवर्णों को साधने का प्रयास कर रहे हों, लेकिन नोएडा के स्थानीय ब्राह्मण नेताओं ने बैठक में अपनी नाराजगी स्पष्ट कर दी। ब्राह्मण नेताओं का कहना था कि यदि शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं ने सवर्णों व ब्राह्मणों के प्रति अपनी बयानबाजी और आचरण में सुधार नहीं किया, तो 2027 के चुनाव में पार्टी को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ेगा।
बेबस नजर आ रहे महानगर अध्यक्ष
पूरे घटनाक्रम के दौरान महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता असहाय स्थिति में दिखाई दिए। सूत्रों के अनुसार, पिछली समीक्षा बैठक में भी बूथ कमेटियों के गठन को लेकर भारी हंगामा हुआ था, तब भी वीर सिंह यादव, दीपक विग समेत 5 पूर्वमहानगर अध्यक्षों को जोन बना कर प्रभारी की भूमिका दी गयी थी, साथ ही केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने संगठन की कमियों और गुटबाजी पर एक विस्तृत फीडबैक रिपोर्ट लखनऊ (पार्टी मुख्यालय) भेजी थी।
अब जब नए सिरे से बूथ प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा रही थी, तब स्थानीय क्षत्रपों द्वारा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र को सीमित करने के प्रयास से पार्टी का चुनावी समीकरण बिगड़ता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया
नोएडा जैसे शहरी और प्रबुद्ध बहुल क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लिए केवल ग्रामीण या पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे चुनाव जीतना संभव नहीं है। जानकारों का कहना कि यादव,गुर्जर और ठाकुर तीनों ही समुदायों के वोट यहाँ बहुत कम है। यदि स्थानीय यादव और गुर्जर क्षत्रप शहरी और सवर्ण नेतृत्व को स्वीकार करने से परहेज करते हैं, तो इसका सीधा असर शहरी मध्यवर्ग और सवर्ण मतदाताओं पर पड़ेगा। वहीं भाजपा के पक्ष में शहरी वोट हमेशा से एकजुट रहा है I 2 बार के विधायक पंकज सिंह के कार्यकाल को चुनोती देने के लिए यदि ऐसे ही विखराव होता रहा या फिर शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस चार-स्तरीय गुटबाजी पर काबू नहीं पाया, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में नोएडा सीट पर अपनी खोई जमीन वापस पाना सपा के लिए एक दूर की कौड़ी साबित हो सकता है।



