सपा में घमासान: बौद्ध दीक्षा समारोह में भगवान राम और कृष्ण को न मानने की प्रतिज्ञा पर रामगोपाल यादव ने राजकुमार भाटी को दी कड़ी चेतावनी, छिन सकता है प्रवक्ता पद! सपा में अंदरखाने पार्टी से निकाले जाने का भी दबाब!

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा विजयदशमी (20 अक्टूबर 2026) के अवसर पर दिल्ली में आयोजित एक बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह में शामिल होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद जहां एक तरफ विपक्षी दलों ने सपा को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं अब पार्टी के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सपा के वरिष्ठ नेता और महासचिव रामगोपाल यादव ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राजकुमार भाटी को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है।

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रामगोपाल यादव का कड़ा रुख और अल्टीमेटम

रामगोपाल यादव ने इस पूरे प्रकरण से पार्टी को दूर रखते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह राजकुमार भाटी का व्यक्तिगत बयान हो सकता है, हम लोग इसका विरोध करते हैं। राजकुमार भाटी को इस प्रकार के बयान नहीं देने चाहिए, अगर वह ऐसा बयान देते रहेंगे तो उन्हें पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया जाएगा।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामगोपाल यादव का यह बयान बिना पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव की सहमति के नहीं आया है। पार्टी नेतृत्व को अंदेशा है कि इस विवाद से आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या है पूरा विवाद?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकुमार भाटी दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अंबेडकर भवन में ‘भारतीय बौद्ध महासभा’ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वायरल वीडियो में उन्हें कथित तौर पर बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़ी 22 प्रतिज्ञाएं और बौद्ध धर्म की शपथ लेते हुए देखा गया, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी मान्यताएं भी शामिल थीं। वीडियो सामने आते ही यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया।

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राजकुमार भाटी की सफाई और बीजेपी पर निशाना

बढ़ते विवाद के बीच राजकुमार भाटी ने सफाई देते हुए धर्म परिवर्तन के दावों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा है और न ही उनका धर्म परिवर्तन का कोई इरादा है। भाटी के अनुसार, वे सिर्फ एक मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए थे और वे महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रचार के पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आईटी सेल का हाथ होने का आरोप लगाया है।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष

हालांकि भाटी ने सफाई दे दी है, लेकिन पार्टी के भीतर उनके इस कदम को लेकर नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सपा के प्रमुख सोशल मीडिया चेहरों—विशाल ज्योति अग्रवाल और आईपी सिंह—ने भी उनके बयानों और कृत्यों की आलोचना की है। विशाल ज्योति अग्रवाल ने तो सोशल मीडिया पर खुलकर लिखा कि पार्टी को राजकुमार भाटी के इस बयान का बचाव करने से बचना चाहिए, वो सीरियल आफेंडर हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे पहले भी मई 2026 में भाटी के बयानों को लेकर विवाद हुआ था, तब पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें फटकार लगाई थी। अब तक पार्टी के संस्थापक सदस्य उदय प्रताप सिंह के प्रभाव के चलते भाटी हर बार विवादों से बच निकलते रहे हैं और दादरी विधानसभा से टिकट पाने में भी सफल रहे हैं। लेकिन इस बार जिस तरह से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने सार्वजनिक रूप से अल्टीमेटम दिया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में राजकुमार भाटी पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें उन्हें प्रवक्ता पद से या यहां तक कि पार्टी से भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

चुनावी रणनीतिक चुनौतियां

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में सपा किसी भी ऐसे विवाद को तूल नहीं देना चाहती जिससे पार्टी का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) या सवर्ण समीकरण प्रभावित हो। पार्टी के अंदर एक धड़े का स्पस्ट मानना है कि राजकुमार भाटी पार्टी को सिर्फ निकसान पहुंचा रहे है और उन्हें पार्टी से निकलना ज़रूरी है। वही बीजेपी और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) पहले ही इस मुद्दे को लेकर सपा पर हिंदू विरोधी होने का ठप्पा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में रामगोपाल यादव का यह अल्टीमेटम सपा का डैमेज कंट्रोल प्रयास माना जा रहा है, ताकि पार्टी चुनावी मैदान में किसी भी प्रकार के वैचारिक और राजनीतिक नुकसान से बच सके। अब ये कितना सार्थक होगा या फिर आंतरिक बढ़ते दबाब में पार्टी प्रवक्ता पद से हटाने से भी आगे जा सकती है ये आने वाले दिनों में दिखाई देगा

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे