ग्रेटर नोएडा शहर के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर में बढ़ती आबादी और पानी की मांग को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। इसके तहत शहर में 19 नए भूमिगत जलाशय (यूजीआर) बनाए जाएंगे। इन नए जलाशयों के निर्माण से न केवल पानी का दबाव बढ़ेगा, बल्कि गंगाजल के भंडारण की क्षमता में भी भारी इजाफा होगा।
सीईओ के निर्देश पर प्रक्रिया शुरू
प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार ने शहर की जलापूर्ति प्रणाली की समीक्षा के बाद इन नए यूजीआर के निर्माण के निर्देश दिए थे। सीईओ के आदेशों का पालन करते हुए संबंधित विभाग ने इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के अनुसार, इन नए यूजीआर का निर्माण शहर में पहले से मौजूद ओवरहेड टैंक परिसरों के भीतर ही किया जाएगा, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

वर्तमान स्थिति और आवश्यकता
वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में जल आपूर्ति के लिए 20 यूजीआर और 39 ओवरहेड टैंक कार्यरत हैं। हालांकि, शहर के तेजी से होते विस्तार और बढ़ती जनसंख्या के मुकाबले यह मौजूदा बुनियादी ढांचा कम पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने जल वितरण प्रणाली के विस्तार का फैसला लिया है। इसके साथ ही विभिन्न सेक्टरों में नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी प्रगति पर है।
इन सेक्टरों को मिलेगा विशेष लाभ योजना के प्रारंभिक चरण में कुछ प्रमुख सेक्टरों में यूजीआर की क्षमता और संख्या पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
सेक्टर टेकजोन-4: यहाँ 10,000 केएलडी (किलो लीटर प्रतिदिन) क्षमता का यूजीआर प्रस्तावित है।
सेक्टर-2: यहाँ 6,000 केएलडी क्षमता का जलाशय बनाया जाएगा।
सेक्टर-3: यहाँ 3,000 केएलडी क्षमता का जलाशय तैयार होगा।
सेक्टर ईटा-1: इस सेक्टर में 1,500 केएलडी क्षमता के यूजीआर का निर्माण कार्य वर्तमान में चल रहा है।
इसके अतिरिक्त टेकजोन-1 और ईटा-2 जैसे क्षेत्रों में भी जलापूर्ति व्यवस्था को विस्तार दिया जाएगा।
इन नए जलाशयों के निर्माण का एक मुख्य उद्देश्य गंगाजल के भंडारण को बढ़ाना है। शहर को मिलने वाले गंगाजल को इन भूमिगत जलाशयों में स्टोर किया जाएगा, जिससे पीक आवर्स (सुबह और शाम) के दौरान निवासियों को पर्याप्त दबाव के साथ पानी मिल सकेगा।
प्राधिकरण के इस कदम से आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों में पानी की किल्लत दूर होने और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।


