नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट: भारत का सबसे बड़ा भूमि अधिग्रहण, कुशल शासन का एक मॉडल

NCR Khabar News Desk
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महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास और कुशल शासन के प्रमाण के रूप में, नोएडा अंतर्राष्ट्रीयएअरपोर्ट (Noida International Airport) देश के नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत भारत के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण का साक्षी बन रहा है। यह विशाल परियोजना, जिसमें 5428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण और लगभग 18 गांवों के 25,000 किसानों का विस्थापन शामिल है, को केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकारों की दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण अभूतपूर्व शांति और सद्भाव के साथ अंतिम चरण तक पहुँचाया जा रहा है।

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यह उल्लेखनीय उपलब्धि, सबसे बड़े विस्थापन अभ्यासों में से एक को एक सामंजस्यपूर्ण परिवर्तन में बदलना, व्यापक रूप से सरकारों के अडिग समर्पण और समन्वित प्रयासों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिन्होंने प्रभावित किसानों के पुनर्वास और उचित मुआवजे को प्राथमिकता दी है।

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अपनी प्रारंभिक अवस्था में, नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा एक रनवे, एक टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के साथ परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है, जिसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ होने का अनुमान है। हालांकि, यह सिर्फ शुरुआत है। हवाई अड्डे के लिए एक महत्वाकांक्षी विस्तार योजना तैयार की गई है, जो इसे भारत के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों में से एक में बदल देगी।

एयरपोर्ट का निर्माण दो मुख्य चरण में किया जा रहा है:

प्रथम चरण: इसमें दो रनवे तैयार होंगे। राज्य सरकार ने प्रथम स्टेज के लिए 4406 करोड़ रुपये खर्च करते हुए 3300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है। इस प्रथम चरण के निर्माण पर 11077 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यह लोकार्पण के लिए तैयार है।
द्वितीय चरण: इस स्टेज के पूरा होने पर, हवाई अड्डे पर कुल पाँच रनवे होंगे।

यात्री क्षमता और निवेश का अनुमान:

परियोजना की चरणबद्ध वृद्धि से यात्री क्षमता में महत्वपूर्ण उछाल आएगा:

शुरुआत: 1 रनवे के साथ 1.2 करोड़ वार्षिक यात्री क्षमता।
वर्ष 2031: 2 रनवे के साथ बढ़कर 3 करोड़ वार्षिक यात्री।
वर्ष 2036: 5 करोड़ वार्षिक यात्री।
वर्ष 2040: 5 रनवे के साथ 7 करोड़ वार्षिक यात्री।

इस विशाल परियोजना पर 2040 तक कुल 36,267 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश की आवश्यकता होगी।

विस्तृत भूमि अधिग्रहण और रनवे योजना:

कुल 5428 हेक्टेयर (13407 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसमें से 4752 हेक्टेयर पांच रनवे के लिए और 676 हेक्टेयर विस्थापन और पुनर्वास उद्देश्यों के लिए है। रनवे का विवरण इस प्रकार है:

पहला और दूसरा रनवे: 1334 हेक्टेयर भूखंड पर निर्मित होंगे।
तीसरा रनवे: 1365 हेक्टेयर।
चौथा रनवे: 1318 हेक्टेयर।
पांचवां रनवे: 735 हेक्टेयर।

यह भूमि विभाजन हवाई अड्डे के भविष्य-उन्मुख डिजाइन को दर्शाता है, जो बढ़ती हवाई यात्रा मांगों को पूरा करने के लिए स्केलेबिलिटी पर जोर देता है।

प्रधानमंत्री का विज़न:

यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न का एक अभिन्न अंग रही है। 2021 में हवाई अड्डे के शिलान्यास कार्यक्रम में, उन्हें दो रनवे का एक मॉडल दिखाया गया था। अब, 28 मार्च को उद्घाटन कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री को हवाई अड्डे के पांच रनवे का एक अद्यतन मॉडल दिखाया जाएगा, जो परियोजना की प्रगति और भव्यता का प्रतीक है।

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा न केवल भारत की हवाई यात्रा क्षमता को महत्वपूर्ण बढ़ावा देने के लिए तैयार है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कुशलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए एक खाका भी प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण भूमि अधिग्रहण और विस्थापन परिदृश्यों में। यह भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और आधुनिक, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रतिबद्धता का एक ज्वलंत उदाहरण है।

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