आशु भटनागर, दादरी (गौतम बुद्ध नगर): समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को दादरी स्थित मिहिर भोज कॉलेज में 2027 के विधान सभाचुनावो के लिए अपनी पहली चुनावी रैली में शिरकत की। दोपहर 1:10 बजे मंच पर पहुंचते ही उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव का औपचारिक आरम्भ किया।
पश्चिमी यूपी के 32 जिलों का जमावड़ा सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें पश्चिमी यूपी के 32 जिलों के करीब 140 विधानसभा क्षेत्रों के 500 सपा पदाधिकारी समेत लगभग 10 हज़ार कार्यकर्ता शामिल हुए। अखिलेश यादव ने इस विशाल जनसभा के माध्यम से न केवल कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा, बल्कि आगामी चुनावों के लिए पार्टी का एजेंडा भी स्पष्ट कर दिया।
पेंशन और सुशासन पर जोर मंच से जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार बनने पर राजनीतिक विद्वेष के कारण दर्ज किए गए झूठे मुकदमों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने महंगाई और एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में किसानों के साथ हुए भेदभाव के मुद्दे को भी उठाया।
प्रमुख वादों में शामिल हैं
समाजवादी पेंशन: उन्होंने कहा कि बंद की गई समाजवादी पेंशन योजना को दोबारा शुरू किया जाएगा।
किसान कल्याण: आलू खरीद का आश्वासन और छुट्टा जानवरों की समस्या का स्थायी समाधान।
रोजगार: युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर लगाम।
भाजपा पर तीखा हमला, बताया “ड्राईक्लीन की दुकान”
अखिलेश यादव ने सत्ताधारी भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे ‘नकारात्मक विचारधारा’ वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने भाजपा को ‘ड्राईक्लीन की दुकान’ बताते हुए आरोप लगाया कि भ्रष्टाचारी लोग इसमें शामिल होकर पाक-साफ हो रहे हैं। उन्होंने ‘अग्निवीर योजना’ और ‘पेपर लीक’ को लेकर युवाओं की निराशा का जिक्र किया और कहा कि समाजवादी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी।
संविधान के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “जो लोग 400 सीटें लाकर संविधान बदलने की बात कर रहे थे, वे अब भूमिगत हो गए हैं। उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलेगा।”
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि समाज के पीछे छूटे हुए वर्गों को मुख्यधारा में लाने का एक निरंतर चलने वाला अभियान है। उन्होंने नोएडा में कथित फर्जी एनकाउंटर और अधिकारियों की हताशा का भी जिक्र किया।
क्षेत्रीय विकास और पुराने कार्यों का उल्लेख नोएडा और दादरी के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली-नोएडा मेट्रो और विजय सिंह पथिक स्टेडियम समाजवादी सरकार की ही देन हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने 50 लाख करोड़ के एमओयू (MoU) के दावे किए, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं उतरा। पीएम मोदी की हालिया रैली पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वहां महंगाई और सिलेंडर का जिक्र तक नहीं हुआ।
भावुक अपील भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने 2011 की अपनी साइकिल यात्रा और मंदिर जाने के बाद मंदिर धुलवाए जाने की घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि उस घटना से उन्हें गहरा आघात पहुंचा था, लेकिन अब जनता अपमान का बदला लेने के लिए तैयार है।
उन्होंने अंत में कहा, “यह स्वाभिमान की धरती है और यहां की हुंकार से सत्ता डगमगाने वाली है। हम सबको मिलकर पीडीए के साथ सामाजिक परिवर्तन की दिशा में काम करना होगा।” इस सम्मेलन के साथ ही समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता तेज कर दी है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी और बढ़ गई है।
भाईचारा सम्मेलन में अखिलेश ने भांपी गुटबाजी, मंच से दिया सियासी संतुलन का संदेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाईचारा सम्मेलन में अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर नेताओं की उपस्थिति और उनके क्रम को देखकर उन्होंने कथित तौर पर सम्मेलन में पनप रही गुटबाजी को भांप लिया, जो भाईचारा और एकता के मूल संदेश के विपरीत थी। ऐसे में अखिलेश यादव ने स्थिति को समझते हुए एक सधी हुई रणनीति अपनाई, ताकि पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखा जा सके और विभिन्न धड़ों को साधकर एक मजबूत संदेश दिया जा सके। उन्होंने सबसे पहले रैली के संयोजक राजकुमार भाटी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की, जो आयोजक के मनोबल को बढ़ाने और एक सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था किन्तु इसके साथ ही, वे विरोधी गुट कहे जाने वाले अतुल प्रधान का नाम लेना नहीं भूले, जिसे राजनीतिक गलियारों में विभिन्न गुटों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।अपने संबोधन के दौरान, अखिलेश यादव ने स्थानीय नेतृत्व को भी महत्व दिया। उन्होंने स्थानीय जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी और नोएडा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता का नाम मंच से लिया, जिससे कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में एक जुड़ाव महसूस हुआ। इतना ही नहीं, उन्होंने आगामी एमएलसी चुनाव के लिए पार्टी के शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी डॉ नितिन तोमर और विधान परिषद सदस्य प्रत्याशी परविंदर भाटी का नाम भी मंच से लेने से नहीं चूके, जो कि चुनावी बिगुल फूंकने और प्रत्याशी को जनता के बीच स्थापित करने का एक स्पष्ट संकेत था।कार्यकर्ताओं के साथ अपने सीधे जुड़ाव को प्रदर्शित करते हुए अखिलेश यादव ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया, वो नीचे बैठे कार्यक्रताओ को पहचान कर उनसे आँखों और हाथो के इशारो से समन्वय बनाते दिखे ।यही नहीं जब उन्होंने अपने कुछ चहेते कार्यकर्ताओं को मंच के नीचे बैठा देखा, तो उन्होंने उन्हें पहचान कर मंच से ही उनमें से एक तेजिंदर विग का नाम तक ले लिया। तो मंच पर पीछे बैठे और हाल में शामिल हुए बुलंद शहर के यूट्यूबर शिक्षक नेता नवीन शर्मा उर्फ नवीन सर का नाम भी मंच से लेकर ब्राह्मण समाज को साधने की पूरी कोशिश की।
बदइंतजामी ने बहार से आये कार्यकर्ताओं का किया बुरा हाल
पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के जोरदार भाषण ने जहां कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नया जोश भरा, वहीं रैली स्थल पर आयोजकों की लचर व्यवस्था भी सुर्खियों में रही। रैली के बाद ‘बदइंतजामी’ यानी अव्यवस्था और कुप्रबंधन की चर्चा आम रही, जिससे बाहर से आए कई समाजवादी कार्यकर्ता बेहद नाराज दिखे। उनके भाषण के बाद रैली स्थल पर मौजूद लोगों के अनुभव ने आयोजन में कई कमियों को उजागर किया।

स्थान चयन और पार्किंग की समस्या
रैली स्थल के चुनाव को लेकर बाहर से आए समाजवादी कार्यकर्ता विशेष रूप से नाराज़ थे। कॉलेज प्रांगण का यह स्थान जीटी रोड के बिलकुल साथ पड़ता है, जिसके चलते जैसे ही बाहर से बड़ी संख्या में गाड़ियाँ आनी शुरू हुईं, पार्किंग को लेकर भारी समस्या सामने आई। कार्यकर्ताओं को अपनी गाड़ियाँ खड़ी करने में और बाद में निकलते समय खासी मशक्कत करनी पड़ी और लंबे जाम से भी जूझना पड़ा। यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की गाडी भी इस अव्यवस्था का शिकार दिखी।
अव्यवस्थित भीड़, गर्मी और पानी की किल्लत
मामला केवल पार्किंग तक ही सीमित नहीं रहा। रैली स्थल पर मंच पर लाइट की वयवस्था बेहद ख़राब थी जिसके कारण लोगो को मंच पर बैठे नेताओ को देखने में असुविधा हो रही थी I रैली में पास में रहने वाली नै नई आबादी के लोगों की भारी भीड़ के कारण भी अव्यवस्था फैली, जिससे बाहर से आए लोगों को पंडाल तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आयोजकों द्वारा पंडाल में लगभग 5 से 7 हज़ार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि सभी सीटें भर जाने के बाद कई लोग कलाकारों के लिए बनाए गए मंच पर भी चढ़ गए।
गर्मी का प्रकोप भी चरम पर था, लेकिन पंडाल में कूलर तो दूर, पंखे भी नदारद थे, जिससे लोगों को भारी परेशानी हुई। इस खचाखच भरे प्रांगण में लोग पानी के लिए तरसते दिखे, जिससे कई बार व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो गई।
कार्यकर्ताओं का स्वास्थ्य और मीडिया बॉक्स पर कब्जा
परिणामस्वरूप, मंच पर स्थानीय नेता भाषण दे रहे थे और इसी दौरान गर्मी व अव्यवस्था के कारण कई कार्यकर्ता चक्कर खाकर गिर पड़े, जिन्हें तुरंत संभाला गया। हालात इतने बदतर थे कि मीडियाकर्मियों के लिए बनाए गए बॉक्स में भी आम लोग घुस आए, जिससे पत्रकारों को अपना काम करने में दिक्कत हुई और उन्हें अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव के जोरदार भाषण ने जहां कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम किया, वहीं रैली में आयोजकों की लचर व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए। बाहर से आए कार्यकर्ताओं और आम जनता में रैली की असुविधाजनक व्यवस्था को लेकर काफी रोष देखा गया, जिसने एक सफल राजनीतिक आयोजन पर असुविधाओं की काली छाया डाल दी।


