लखनऊ: उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेरा ने अपने ‘जरनल रेगुलेशंस 2019’ में 10वां संशोधन किया है। रियल एस्टेट एक्ट 2016 की धारा 85 के तहत किए गए ये नए बदलाव 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो गए हैं। इस संशोधन के बाद अब उन खरीदारों को भी कानूनी राहत मिल सकेगी, जिन्होंने अनजाने में बिना पंजीकरण वाली परियोजनाओं में निवेश किया है।
बिना पंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों को बड़ी राहत रेरा के इस निर्णय को उन हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए ‘संजीवनी’ माना जा रहा है, जिनकी पूंजी गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट्स में फंसी हुई है। रेगुलेशन संख्या 24 में किए गए बदलाव के अनुसार, अब ऐसे खरीदार भी अपनी शिकायतों के निवारण के लिए यूपी रेरा का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इससे पहले तकनीकी कारणों से ऐसी परियोजनाओं के खरीदारों को शिकायत दर्ज करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
मेरिट के आधार पर होगी शिकायतों की सुनवाई
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने बताया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सक्षम और जन-हितैषी बनाना है। रेगुलेशन 24 के तहत, रेरा अब बिना पंजीकृत परियोजनाओं की शिकायतों की सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान बेंच यह तय करेगी कि क्या संबंधित परियोजना को रेरा एक्ट के तहत पंजीकरण की आवश्यकता थी। यदि पंजीकरण अनिवार्य पाया जाता है, तो बेंच मामले को रेरा सचिव के पास बिल्डर के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज देगी।
इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए यूपी रेरा अपने पोर्टल पर एक विशेष व्यवस्था शुरू कर रहा है, जहाँ खरीदार बिल्डर से संबंधित दस्तावेज जमा कर सकेंगे ताकि अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स का डेटा तैयार किया जा सके।
ट्रांसफर और उत्तराधिकार शुल्क की सीमा निर्धारित एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव रेगुलेशन 47 में किया गया है, जो फ्लैट या संपत्ति के ट्रांसफर (हस्तांतरण) शुल्क से संबंधित है। अक्सर देखा गया है कि बिल्डर मालिकाना हक बदलने के नाम पर खरीदारों से मोटी रकम वसूलते थे। अब रेरा ने इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी है:
पारिवारिक हस्तांतरण/उत्तराधिकार
यदि आवंटी की मृत्यु के बाद संपत्ति परिवार के किसी सदस्य को ट्रांसफर की जाती है, तो शुल्क मात्र 1,000 रुपये होगा।
अन्य सदस्य को ट्रांसफर: परिवार के बाहर किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति हस्तांतरित करने की स्थिति में अधिकतम शुल्क 25,000 रुपये निर्धारित किया गया है।
कागजी कार्यवाही में भी मिलेगी छूट संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संपत्ति ट्रांसफर के मामले में अब नया ‘एग्रीमेंट फॉर सेल’ करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा एग्रीमेंट में ही आपसी सहमति से बदलाव दर्ज किए जा सकेंगे और बिल्डर को अपने रिकॉर्ड में इसे अपडेट करना होगा। इससे खरीदारों का समय और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी का खर्च बचेगा।
यूपी रेरा के इन संशोधनों से न केवल बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगेगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। स्थानीय निवासियों और घर खरीदारों ने रेरा के इस कदम का स्वागत किया है।


