नोएडा प्राधिकरण की कथित मनमानी नीतियों और ‘मिक्स-लैंड यूज़’ (Mixed-Land Use) नियमों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सियासी व सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व महानगर अध्यक्ष और पंजाबी विकास मंच के चेयरमैन, दीपक विग ने इन नीतियों को ‘अन्यायपूर्ण और जनविरोधी’ बताते हुए प्राधिकरण पर ‘लालची सौदागर’ जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
दीपक विग ने अपने बयान में प्रश्न उठाया कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे नोएडावासी उत्तर प्रदेश में नहीं, बल्कि किसी और ही देश में रह रहे हैं, जहाँ उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से अलग नियम-कानून चलते हैं।
दीपक विग ने प्राधिकरण को लेकर कई आपत्तियां जताई हैं जिनमे प्रमुख हैं
सड़क की चौड़ाई का मानक:
विग ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में 18 मीटर चौड़ी सड़क पर मिक्स-लैंड यूज़ परिवर्तन की अनुमति है, जबकि नोएडा में यह सीमा 24 मीटर निर्धारित की गई है। उन्होंने मांग की कि नोएडा प्राधिकरण को भी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के समान 18 मीटर रोड पर मिक्स-लैंड यूज़ परिवर्तन की अनुमति देनी चाहिए।
मनमाने शुल्क वृद्धि पर सवाल:
दीपक विग ने प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित नए शुल्कों पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार:
औद्योगिक सेक्टरों में: मिक्स-लैंड यूज़ परिवर्तन के लिए औद्योगिक और कमर्शियल भूमि के अंतराल का 25% निर्धारित किया जा रहा है।
रिहायशी सेक्टरों में: कमर्शियल और आवासीय सेक्टर के सर्कल रेट के अंतराल का 50% निर्धारित किया जा रहा है।
विग ने याद दिलाया कि पहले आवासीय सेक्टरों में मिक्स-लैंड यूज़ परिवर्तन के लिए यह शुल्क केवल 10% हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर 50% करना ‘बिल्कुल गलत’ और आम जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने सीधे तौर पर नोएडा प्राधिकरण पर ‘लालची सौदागर’ जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय आम जनता के लिए न्यायपूर्ण नहीं है।
‘खास लोगों को फायदा’ पहुंचाने का आरोप:
दीपक विग ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि नोएडा प्राधिकरण ने कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए यह लैंड यूज़ चेंज स्कीम लाई थी। उन्होंने कहा, “अब उन खास लोगों का मिक्स-लैंड यूज़ चेंज हो चुका है, परन्तु हमेशा की तरह आम जनता फिर लटक गई।” यह नीति आम जनता के लिए नहीं है, बल्कि चुनिंदा लोगों के हितों को साधने के लिए बनाई गई है।
न्यायपूर्ण शुल्क और अनुमत गतिविधियां:
विग ने सुझाव दिया कि आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में मिक्स-लैंड यूज़ परिवर्तन के लिए शुल्क 10% से 15% के बीच ही होना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने आवासीय क्षेत्रों में जो मिक्स-लैंड यूज़ चेंज हो, उसमें विभिन्न जनोपयोगी सेवाओं को अनुमति देने की वकालत की। इनमें बैंक, क्रेच, प्ले स्कूल, लेडीज ब्यूटी पार्लर, गेस्ट हाउस, पीजी, जनरल स्टोर (ग्रॉसरी का सामान सहित), क्लिनिक, नर्सिंग होम, प्रॉपर्टी डीलर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड एकाउंटेंट और इंटीरियर डिजाइनिंग के कार्यालय शामिल हैं।
दीपक विग ने प्राधिकरण से अपील की है कि वह अपनी नीतियों को जनहितैषी बनाए और आम जनता के साथ न्याय करे, ताकि नोएडावासी खुद को उत्तर प्रदेश का ही अभिन्न अंग महसूस कर सकें और उन्हें अलग-थलग न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मनमानी नीतियों में सुधार नहीं किया गया, तो वे आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।


