नोएडा में मजदूरों के उपद्रव के बाद गिरफ्तारी में किसान सभा ने लगाया लीपापोती का आरोप, दबाव में रिहाई शुरू!

NCR Khabar News Desk
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नोएडा/गौतम बुद्ध नगर: मजदूरों के उपद्रव के बाद पुलिस द्वरा अकी जारी गिरफ्तारियो पर किसान संगठनों ने प्रशासन पर मजदूरों की गिरफ्तारी के वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है दाव है कि तीव्र जनदबाव के बीच 200 से अधिक मजदूरों की रिहाई शुरू हो गई है। रिहाई का यह सिलसिला अभी जारी है।

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किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने दावा किया कि पुलिस ने करीब 1200 मजदूरों को गिरफ्तार किया था, लेकिन इस सच्चाई को छिपाने के लिए केवल 70 गिरफ्तारियां दिखाकर जनता को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा कि सैकड़ों बच्चों को भी नहीं बख्शा गया और कई गिरफ्तारियों का कोई रिकॉर्ड या तो मौजूद नहीं है या उसे जानबूझकर छुपाया गया है। वर्मा ने इसे “कानून और संविधान की सीधी-सीधी हत्या” करार दिया।

सीटू के जिला अध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा की स्थिति पर सवाल उठाते हुए डॉ. वर्मा ने बताया कि उन्हें 12 अप्रैल से अवैध नजरबंदी में रखा गया है। उन्होंने प्रशासन के इस कृत्य को “तानाशाही का खुला उदाहरण” और “संविधान के जीने के अधिकार पर हमला” बताया।

किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने क्षेत्र में मजदूरों के शोषण को चरम पर बताया। उन्होंने कहा कि मजदूरों को 12-12 घंटे काम कराया जाता है, उन्हें ओवरटाइम या साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जाता, और कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन शोषण जैसी घटनाएं भी खुलेआम चल रही हैं, जबकि प्रशासन इन सब पर मूकदर्शक बना हुआ है।

न्यूनतम मजदूरी के मुद्दे पर नागर ने कहा कि वर्तमान में दिए जा रहे ₹11,353 की न्यूनतम मजदूरी एक मजाक है, जबकि मजदूर ₹26,000 की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ₹11,000 की कमाई में से ₹5,000 किराए में और ₹3,000 गैस में चले जाते हैं, जिसके बाद मजदूर कैसे जीवन यापन करेंगे, सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

किसान सभा ने श्रम कानून लागू कराने वाले अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ये अधिकारी खुद फैक्ट्री मालिकों के साथ मिले हुए हैं और रिश्वतखोरी के जरिए मजदूरों के हक कुचल रहे हैं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों के जायज गुस्से को दबाने के लिए उसे “नक्सली” और “विदेशी साजिश” का हिस्सा बताने की साजिश रची जा रही है।

किसान सभा के उपाध्यक्ष गबरी मुखिया ने कहा कि सरकार मजदूरों को इंसान नहीं, बल्कि “सस्ता श्रम” समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पूंजीपतियों से चंदा लेकर चलने वाली सरकार और उसके अधिकारी करोड़ों की संपत्ति बना रहे हैं, जबकि मजदूर भूख और कर्ज में डूबे हुए हैं।

किसान सभा के जिला महासचिव संदीप भाटी ने कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि धारा 151 के तहत 24 घंटे से अधिक हिरासत गैरकानूनी है, लेकिन मजदूरों को 5-5 दिन तक कैद रखा गया। भाटी ने पुष्टि की कि करीब 1200 मजदूर, जिनमें 55 महिलाएं भी शामिल हैं, बिना किसी अपराध के जेलों में ठूंस दिए गए थे।

किसान सभा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सभी मजदूरों को तुरंत रिहा नहीं किया गया, गंगेश्वर दत्त शर्मा की नजरबंदी खत्म नहीं की गई, और मजदूरों की ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी की मांग नहीं मानी गई, तो किसान संघर्ष मोर्चा पूरे जिले में एक बड़ा आंदोलन छेड़ेगा।

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