आशु भटनागर। कल देर रात तक “मामला लीगल है सीजन 2” वेबसीरीज देखने के बाद आज शनिवार सोचकर हम सुबह देर तक सोने के मूड में थे कि अचानक स्वयं साक्षात नारद जी अवतरित हो गए हम समझ गए कि आज फिर से कोई गलती हो गई है, इतनी सुबह अकारण तो प्रभु नहीं आयेंगे। चद्दर तकिया दूर फेंक कर साक्षात दंडवत करते हुए हमने प्रभु से कहा “प्रभु विराजिये और कहिए हमारे लिए क्या आदेश है?”
नारद जी ने हमें शांति से दयाभाव से देखा तो हमें लगा कि प्रभु आज उग्र तो नहीं है, हम कुछ कह पाते उससे पहले ही नारद जी बोले वत्स आज समस्त जगत मेरी जयंती मना रहा है और तुम चद्दर तान कर सो रहे हो। हम समझ गए कि हमेशा की तरह हमसे फिर गड़बड़ हो गई है अपने ही कार्यक्षेत्र के आदिपुरुष की जयंती को भूलना किसी महापाप से कम नहीं है , हम फिर दंडवत होते हुए बोले महाराज क्षमा कर दीजिए, बीते एक माह से श्रमिकों के आंदोलन और बंगाल के चुनाव में ऐसे उलझे हैं कि बहुत सारी बातें समय से नहीं कर पाए। यहाँ तक कि अपने घर में गैस ……
हम ओर कुछ कह पाते नारद जी ने बात पकड़ ली बोले नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के बाद क्या-क्या हो रहा है ? क्या इस देश में श्रम की महत्ता कम हो गई है, आखिर श्रमिकों को हिंसा का सहारा क्यों लेना पड़ा ? नारद जी का प्रश्न सीधा और मर्मभेदी था, नारद जी को क्रोध आते हुए देखा अपने हाथ जोड़कर कहा प्रभु ऐसा कुछ नहीं है कि देश में श्रम की महत्ता कम हो गई है किंतु समय, काल, परिस्थितियों के चलते कुछ ऐसे कारण उत्पन्न हो गए जिसका लाभ देश और समाज विरोधी लोगों ने उठा लिया ।
यह सच है कि वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका ईरान युद्ध के कारण भारत में गैस के दामों को लेकर एक आराजक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा था और सरकारी तंत्र बहुत कुछ जानकर भी उसको काबू करने में लगा था । बस इसी ‘सिस्टमैटिक गैप’ का फायदा उन असामाजिक तत्वों और ‘अर्बन नक्सल’ विचारधारा वाले समूहों ने उठाया, जो उत्तर भारत के इस उभरते औद्योगिक हब को अस्थिर करना चाहते थे। नारद जी तुरंत हमें टोकते हुए कि अगर किसी राज्य में राज्य विरोधी तत्व सक्रिय हो जाए तो और जनता उसके बाद सडको में आ जाए तो इसका मतलब यह है कि जनता के हितों का कहीं ना कहीं शोषण हो रहा है। समाजशास्त्र का इतना बेसिक ज्ञान नहीं है क्या ?
हमने सहमति दिखाते हुए कहा कि आप सही कह रहे है, सच ये है कि दशको से पिछड़े उत्तर प्रदेश में बीते एक दशक में एक बड़े ठहराव के बाद जब उद्योगों में रफ्तार पकड़ी तो उत्तर प्रदेश सरकार से लेकर अधिकारियों तक सबका ध्यान औद्योगिक चमक पर अधिक रहा श्रमिकों के हित समस्याएं कहीं दब गई थी पर जैसे कि आप भी कहते हैं कि जो भी होता है प्रभु इच्छा से होता है तो हिंसक आन्दोलन के कारण ही सही उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहली बार मात्र 8 घंटे में ही संज्ञान लेते हुए श्रमिकों की बड़ी मांग वेतन वृद्धि को मान लिया और उसके बाद लगातार संज्ञान लेते हुए श्रमिकों से संबंधित कई मामलों पर सुधारात्मक काम हो रहे हैं। नोएडा के बनने से लेकर आज तक जो कमियां श्रमिको के लिए थी उन पर काम शुरू हो रहा है। संभवत: अगर यह सब सही दिशा में चला तो अगले एक दशक में बड़े परिणाम देखेंगे ।
नारद जी तुरंत आंख दिखाते हुए हमें रोक कर बोले सरकारी मृतुन्जयी भाषा मत बोलो, पत्रकार होने के नाते बताओ! यह बताओ कि श्रमिकों के आंदोलन को अगर बाहरी लोग अराजक बनाए तो फिर श्रमिकों को जेल क्यों भेजा गया ? कल श्रमिक दिवस(1 मई) के दिन क्यों श्रमिकों के कार्यक्रमों को लेकर तमाम रोकथाम लगाई गई ? सुधार की आड़ में श्रमिकों के शोषण की कहानियों को मत दबाओ ।
हम समझ गए नारद जी हमसे पहले ही किसी अल्ट्रा लेफ्ट संपादक या मजदूर नेता के पास से होकर आ रहे हैं और उसके चक्कर में हमें रेल रहे हैं । बात को घुमाते हुए हम फिर बोले कि महाराज यह सही है कि अक्सर गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है।पुलिस की संख्ती से ऐसी कई कहानियां भी सामने आई जिससे मन द्रवित भी हुआ ऐसा भी कहा गया जैसे पुलिस आन्दोलन के हिंसक होने और अपनी नाकामी का बदला ले रही है, किन्तु किसी भी उपद्रव के बाद जब पुलिस सख्त होती है तो उसमें सबसे पहले निर्दोष लोग ही पकड़े जाते हैं, फिर भी शुरुआती दो से तीन दिनों तक चले मुहीम के बाद अधिकांश लोग छोड़ दिए गए थे और पुलिस की पकड़ में आए कई षड्यंत्रकारी अब जेल में है ।
श्रमिकों के हिंसक आंदोलन से डरा पुलिस और प्रशासनिक तंत्र निश्चित तौर पर इसकी पुनरावृत्ति को नहीं होने देना चाहता था। इसलिए जगह-जगह प्यार से और फोर्सफुली भी श्रमिक दिवस के दिन कई कार्यक्रमों को रोका और कम किया गया। लेकिन इसका दूसरा पक्ष ये भी है की श्रमिक दिवस के दिन ही बीते 25 वषों पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बड़ी घोषणाएं की गई, स्वास्थ्य कैंप लगाए गए यहां तक की पुराने बने श्रमिक कुंज की मरम्मत के काम भी शुरू किए गए है। जिनका निश्चित ही स्वागत किया जाना चाहिए ।
यह सच है कि जब भी समाज को नियमों में बांधा जाता है, अधिकारों से अधिक कर्तव्यों पर साधा जाता है तो आमजन को उस परेशानी होती है क्योंकि इससे हमारी स्वतंत्रता में कमी महसूस होती है। किंतु प्रभु अगर यह राष्ट्र नियम से ना चले, आम जन कर्तव्य बोध भूल जाए तो देश में रामराज नहीं जंगल राज होगा।देश में उद्योगपति और श्रमिक किसी भी गाड़ी के वह दो पहिए हैं जिनमें अगर समन्वय ना हो तो वह गाड़ी नहीं चल सकती निश्चित तौर पर उसे समन्वय को बनाए रखने का प्रयास दोनों तरफ होगा। श्रमिकों को उद्यम के प्रति अपने कर्तव्य याद रखने होंगे तो उद्योगपतियों को भी श्रमिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन करना सीखना होगा और मुझे लगता है कि धीरे-धीरे दोनों ही पक्ष इसी ओर बढ़ रहे हैं । पुलिस और प्रशासनिक तंत्र दोनों ही सख्त भी है और दोनों ही और सकारात्मक दृष्टिकोण से काम कर रहे है ताकि उत्तर प्रदेश का ग्रोथ इंजन बन चुके नोएडा को रोका ना जा सके बल्कि उसकी गति में लगी जंग को हटाकर फिर से शुरू कर दिया जाए।
हमारे विचारो को भाषण में बदलते देख नारद जी धीरे से उठे और बोले वत्स अब मुझे भी नोएडा से निकालना है, ट्रम्प से मिलने जाना है तुम अपनी छुट्टी का आनंद लो! मुझे अच्छा लगा कि तुम एक तरफा बात नहीं कर रहे हो दोनों पक्षों को समझ कर उसे पर अपनी राय रख रहे हो, इतना कहकर नारद जी अंतरध्यान हो गए और हम सुबह ही अपने घर में खत्म हुई गैस का इंतजाम करने में लग गए है । किसी के पास एक्स्ट्रा सिलेंडर हो तो हमें फ़ौरन संपर्क करें नहीं तो हमाँरी श्रीमती जी आज नारद जयंती पर हमसे व्रत रखवा देंगी।


