नोएडा। बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार के बाद अखिलेश यादव भले ही ममता बनर्जी को जाकर सांत्वना देते देखे गए पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए नोएडा इकाई से अंतर्कलह की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार को नोएडा में आयोजित सपा की मासिक बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब स्थानीय नेताओं और महानगर अध्यक्ष के बीच वैचारिक मतभेद और निजी आरोप-प्रत्यारोप खुलकर सामने आ गए।
नेतृत्व पर उठे सवाल : शहरी क्षेत्र में वोट बढ़ाने में विफल रहने का आरोप
बैठक के दौरान नोएडा महानगर के पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में कई वरिष्ठ नेताओं ने वर्तमान महानगर अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नाराज नेताओं का आरोप है कि अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी के शहरी वोट बैंक में कोई वृद्धि नहीं हुई है। नेताओं ने कहा कि उन्हें विशेष रूप से शहर के सेक्टरों और झुग्गी-झोपड़ियों में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद उन्हें 2022 विधान सभा चुनाव के मुकाबले भी पार्टी को बहुत कम वोट मिले हैं जबकि 22 में सपा अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ी थीं
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विरोध कर रहे नेताओं का तर्क है कि नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों और यादव बाहुल्य मतों की जिम्मेदारी तो पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में स्थानीय कैडर ने पहले ही संभाल रखी है, लेकिन महानगर अध्यक्ष की कार्यशैली पार्टी के शहरी विस्तार में बाधा बन रही है। साथ ही, उन पर पूर्व अध्यक्षों का सम्मान न करने और तानाशाही रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया गया। कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से उनके इस्तीफे तक की मांग कर डाली।
महानगर अध्यक्ष का पलटवार: नेताओं को बताया ‘भाजपा का एजेंट’
विपक्ष के तीखे हमलों के बाद महानगर अध्यक्ष ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने खुद पर आरोप लगाने वाले नेताओं में कई पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मिला हुआ करार दिया। अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह विरोध जारी रहा, तो वे एक-एक करके ऐसे ‘जातिवादी’ और ‘ग्रामीण’ नेताओं की पोल खोल देंगे। भाजपा समर्थित शहर की एक संस्था अध्यक्ष द्वारा मसूरी यात्रा पर समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं के ट्रिप पर जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोग भाजपा नेताओं से मिले हुए हैं और यही लोग बाद में पांच-पांच लाख रूपए लेकर बिक जाते हैं और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी की मदद करते हैं

इतना ही नहीं, महानगर अध्यक्ष ने अपने ही नेताओ पर आरोप लगाया कि लाखो रूपए भाजपा से लेने वाले पार्टी के ही कुछ नेता पत्रकारों को 5000-5000 रुपये देकर उनके खिलाफ और पार्टी विरोधी खबरें छपवा रहे हैं।
12 लाख रुपये और ‘स्टूडियो’ का विवाद
बैठक के बाद पार्टी एक नेता ने मीडिया से आफ द रिकार्ड बात करते हुए महानगर अध्यक्ष की बात सच होने से इनकार नहीं किया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि जिले के ही एक कद्दावर नेता पर भाजपा के एक एमएलसी से अपने स्कूल के लिए 12 लाख रुपये अनुदान लेने का आरोप है। चर्चा तो ये भी है कि इसी पैसे से स्कूल में एक आधुनिक स्टूडियो बनवाया गया है, जिसका उपयोग आजकल वो नेता अपने सोशल मीडिया के जरिये जातिवादी मिशन के लिए वीडियो बनाने में कर रहे है यही नहीं उक्त नेता ने तो स्वयं जिले के एक कद्दावर भाजपा सांसद को अपना घनिष्ठ मित्र तक बताया है। नेता ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर अध्यक्ष जी वाकई पार्टी का भला चाहते हैं, तो उन्हें नोएडा के भी ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए जो भाजपा से पैसे लेकर समाजवादी पार्टी का नुक्सान कर रहे हैं।
अखिलेश यादव से दखल की मांग
पार्टी के भीतर बढ़ती इस कलह ने कार्यकर्ताओं में चिंता पैदा कर दी है। विरोध कर रहे गुट का कहना है कि यदि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जल्द ही नोएडा इकाई के हालातों का संज्ञान नहीं लिया और मौजूदा नेतृत्व में बदलाव नहीं किया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नेताओं ने दावा किया है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो पार्टी के कोर समर्थक और समर्पित नेता सामूहिक रूप से किनारा कर सकते हैं।


