नोएडा। उत्तर प्रदेश के ‘शो-विंडो’ कहे जाने वाले नोएडा में एक ऐसी भयावह तस्वीर सामने आई है, जो हमारे प्रशासनिक तंत्र के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। सेक्टर-78 स्थित ‘अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2’ सोसाइटी में रहने वाले लोग अब अपने ही घर से बाहर निकलते समय हेलमेट पहनने को मजबूर हैं। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि उन मासूमों की विवशता है, जिनके सिर पर हर वक्त ऊपर से गिरते प्लास्टर की तलवार लटक रही है।
इमारतें बनीं ‘मौत का कुआं’
सोसाइटी की बहुमंजिला इमारतों से लगातार गिरता प्लास्टर केवल एक तकनीकी खामी नहीं, बल्कि बिल्डर की लापरवाही और प्रशासन की आंखों पर बंधी पट्टी का परिणाम है। आए दिन हो रही इन घटनाओं में लोग घायल हो रहे हैं और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं। जिस परिसर में निवासियों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए था, वहां आज खौफ का बसेरा है। एक रिहायशी इलाके में हेलमेट का इस्तेमाल करना इस बात का सबूत है कि सिस्टम सुरक्षा के बुनियादी मानकों को सुनिश्चित करने में पूरी तरह फेल हो चुका है।
प्रशासनिक निष्क्रियता और सांसद डा महेश शर्मा की अनदेखी से निवासियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को लगाई गुहार
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि इस गंभीर खतरे के बावजूद संबंधित प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शिकायतें करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगो का आरोप है जिन डा महेश शर्मा को उन्होंने यहाँ से 1 बार विषयक और 3 बार रिकार्ड वोटो से सांसद बनाया उनकी चुप्पी इस बात को और पुख्ता करती है कि जनता के हितों का ख्याल चुनावी रैलियों तक ही सीमित है। मुख्य्म्नात्री जी ने सांसद और प्रशासन पर निरीक्षण के लिए जिला प्रभारी नियुक्त किये, किन्तु दूसरी बार जिला प्रभारी नियुक्त हुए कुंवर ब्रजेश सिंह बस प्रचार कार्यक्रमों में रिबन काटने और गुणगान तक सीमत है I जब बात बुनियादी सुरक्षा और जान-माल की हिफाजत की आती है, तो जिम्मेदार अधिकारी और नेता नदारद हो जाते हैं। आखिर इस ‘सिस्टम’ के पास क्या कोई ठोस योजना है, या वे युवराज की तरह किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?
जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो अब अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 के निवासियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) का सहारा लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय को गुहार लगाई है। यह कदम खुद में एक बड़ा सवाल है—कि क्या एक आम नागरिक को अपनी जान बचाने के लिए राज्य के मुखिया को ट्वीट करना पड़ेगा?

नोएडा जैसे आधुनिक शहर में, जहां रियल एस्टेट का कारोबार अरबों में है, वहां निवासियों का असुरक्षित होना पूरे सिस्टम पर एक गहरा दाग है। सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग हेलमेट पहनकर अपने टावर से बाहर निकलेंगे? यह केवल एक सोसाइटी की समस्या नहीं, बल्कि नोएडा के उन सभी निवासियों के लिए एक चेतावनी है, जो घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही भरे रखरखाव के बीच रह रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन दिखावे की राजनीति छोड़े और जिम्मेदार बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई कर जवाबदेही तय करे।
क्या सरकार तब जागेगी जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी, या समय रहते इस पर कोई निर्णायक कदम उठाया जाएगा? निवासियों की उम्मीदें अब मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं।


