नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इससे पहले आज दोपहर धर्मेंद्र प्रधान ने नीट (NEET) परीक्षा विवाद के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि देश के शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए प्रह्लाद जोशी पर भरोसा जताया है। प्रह्लाद जोशी के पास फिलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का भी प्रभार है। अब वे अपने मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ एक महीने से जारी आंदोलन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही पिछले करीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का विरोध-प्रदर्शन भी समाप्त हो गया है।
गौरतलब है कि नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में 20 जून से छात्र जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना, नीट पेपर लीक मामले में उच्चस्तरीय जवाबदेही तय करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।

आज दोपहर जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि हुई और राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया, जंतर-मंतर पर डटे छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
नए शिक्षा मंत्री के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब प्रह्लाद जोशी के सामने देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी।



