नोएडा (सेक्टर-51)। नोएडा के हाई-प्रोफाइल आयोजनों में सुरक्षा इंतजामों की पोल एक बार फिर खुल गई है। गुरुवार को सेक्टर-51 स्थित ‘वेडिंग विला’ बैंक्वेट हॉल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती लिफ्ट अचानक तेज झटके के साथ नीचे गिरी और बीच में अटक गई। इस लिफ्ट में लगभग आधा दर्जन लोग करीब 20 मिनट तक फंसे रहे। गनीमत यह रही कि मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बेहद दर्दनाक हादसा टल गया।
यह घटना तब घटी जब बैंक्वेट हॉल में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना दूसरी लिफ्ट में थे और जिस लिफ्ट में तकनीकी खराबी आई, उसमें वे मौजूद नहीं थे।
वीआईपी मौजूदगी से तुरंत एक्टिव हुआ प्रशासन
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष और अन्य वीआईपी नेताओं की मौजूदगी के कारण पुलिस और सुरक्षाकर्मी तुरंत अलर्ट मोड में आ गए। सूचना मिलते ही थाना सेक्टर-49 पुलिस ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला। लगभग 20 मिनट की कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के बाद लिफ्ट में फंसे सभी आधा दर्जन लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
थाना प्रभारी सेक्टर-49 ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ था। पुलिस की तत्परता से सभी लोगों को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी के भी घायल होने की खबर नहीं है।

संपादकीय नजरिया: मेंटेनेंस की लापरवाही और ‘वीआईपी कल्चर’ का सच
यद्यपि इस घटना में सभी लोग सुरक्षित हैं और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन यह हादसा नोएडा के निवासियों और स्थानीय प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सेक्टर-51 जैसे व्यस्त और पॉश इलाके के एक प्रसिद्ध वेडिंग विला बैंक्वेट हॉल में इस तरह का हादसा होना, प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है।
नोएडा के स्थानीय निवासियों के लिहाज से यह बेहद चिंताजनक विषय है। बैंक्वेट हॉल मालिक आयोजनों से लाखों रुपये का मुनाफा कमाते हैं, लेकिन क्या लिफ्ट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के ‘फिटनेस और मेंटेनेंस’ पर ध्यान दिया जाता है?
दूसरा बड़ा सवाल यह भी उठता है कि पुलिस और रेस्क्यू टीम ने जिस फुर्ती से 20 मिनट के भीतर लोगों को बाहर निकाला, क्या आम दिनों में या बिना किसी वीआईपी की मौजूदगी के भी यही तत्परता देखने को मिलती? यह कड़वी सच्चाई है कि वीआईपी मूवमेंट के कारण सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं, जिससे रेस्क्यू में देरी नहीं हुई।
आगे का रास्ता: लिफ्ट ऑडिट है जरूरी
नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन को अब महज ‘स्थिति सामान्य है’ कहकर इस मामले को रफा-दफा नहीं करना चाहिए। शहर के सभी बैंक्वेट हॉलों, मैरिज होम और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की लिफ्टों का अनिवार्य ‘सेफ्टी ऑडिट’ होना चाहिए। लापरवाही बरतने वाले बैंक्वेट हॉल प्रबंधकों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान जोखिम में न पड़े। आज किस्मत अच्छी थी कि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन अगली बार लापरवाही भारी पड़ सकती है।



