आशु भटनागर। सत्ता के गलियारों में प्रथम समाचार इस बार दादरी में हो रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सम्मान समारोह से है । असल में अब पारंपरागत तौर पर शनिवार या रविवार की जगह सोमवार (3 अगस्त) को हो रहे इस कार्यक्रम को लेकर जिले की राजनीति ने धुरंधर फिल्म की तरह वह सभी रंग देख लिए जिसमें ताज़ा ताज़ा धुरंधर बने नवाबसिंह नागर को सबसे अंत में पता लगा कि डॉ महेश शर्मा ही भाजपा के असली ज़मील जमाली या यूँ कहें असली धुरंधर है। तो हुआ यूँ कि डॉ महेश शर्मा की उफक(चमक) में बरसों से जिले की राजनीति में उपेक्षित पड़े नवाब सिंह नगर में जिले की राजनीति में शिखर पर बैठे लोकसभा सांसद डॉ महेश शर्मा से अपना पुराना हिसाब करने की कोशिश में उनके पुराने धुरविरोधी रहे सांसद सुरेंद्र सिंह नागर के साथ मिलकर प्रदेश अध्यक्ष का एक कार्यक्रम रखवा लिया । यहां तक सब सही था पर महेश शर्मा के साथ अपनी पुरानी लड़ाई की कुंठा में नवाब सिंह नागर यह भूल गए कि राजनीति में मन में कुछ हो किंतु सार्वजनिक तौर पर उसको दर्शाया नहीं जाता। उन्होंने कार्यक्रम के प्रमोशन में प्रदेश अध्यक्ष के बाद अपना और सुरेंद्र नागर का बड़ा फोटो लगाकर डॉ महेश शर्मा समेत जिले के समस्त प्रतिनिधियों को गायब कर दिया । बस यही से राजनीति शुरू हो गई और कार्यक्रम में व्यवधान आ गया। खैर जैसे तैसे करके एक अगस्त की जगह 3 अगस्त को इस कार्यक्रम को किया गया। गौतम बुध नगर से लेकर नोएडा से लेकर लखनऊ तक पार्टी में गुटबाजी की खबरें आम हुई तो मीडिया पर छा गई। परिस्थितियां विषम हुई तो शनिवार रात को ही नवाब सिंह नगर लखनऊ पहुंचे और पार्टी ने वहीं बैठकर उनसे कार्यक्रम के नए पोस्टर्स के डिजाइन को डलवाया जिसमें सुरेंद्र नागर के साथ डॉ महेश शर्मा भी दिखाई दे रहे है। खैर अंत भला तो सब भला, फिलहाल कार्यक्रम को लेकर आज सुबह के दैनिक अखबारों में जो विज्ञापन दिए गए उसमें भी महेश शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि दिखाई दे रहे हैं उनके साथ ही जिला संगठन के नेताओं के फोटो भी लगाई जा रहे है । कार्यक्रम में 20000 लोगों की भीड़ जताने का दावा किया जा रहा है जिसके जरिए कुछ माह पूर्व हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी के कार्यक्रम के रिकॉर्ड को तोड़ने की पूरी कोशिश की जा रही है । किंतु एक शंका और भी है कि दादरी में हो रहे दूसरे बड़े इस कार्यक्रम के बाद आयोजक की राजनीति समाप्त होने का रिकॉर्ड कायम रहा तो राजकुमार भाटी के बाद नवाब सिंह नागर अगले व्यक्ति होंगे।
सत्ता के गलियारों से दूसरा समाचार भी भाजपा जिले में भाजपा के शिखर पुरुष डॉक्टर महेश शर्मा और नवाब सिंह नागर के बीच का ही है तो हुआ यह की 30 तारीख को जिले के एक व्यापार मंडल का कार्यक्रम नोएडा के बैंक्वेट हॉल में रखा गया। इस कार्यक्रम में भाजपा के मंत्री सतीश महाना के अलावा डॉक्टर महेश शर्मा, पंकज सिंह समेत नवाब सिंह नागर को भी बुलाया गया था । यहां तक सब सही था, किंतु दादरी में होने वाले कार्यक्रम की गुटबाजी का काला साया इस कार्यक्रम पर भी पड़ गया। जानकारों की माने तो डॉ महेश शर्मा और नवाब सिंह नागर के बीच दादरी कार्यक्रम के कारण हुए मतभेदों का असर यह रहा कि डॉ महेश शर्मा मुख्य अतिथि सतीश महाना के आने के आधे घंटे बाद तब आए जब नवाब सिंह नगर का भाषण हो चुका था और दोनों को बुलाकर नोएडा विधान सभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने के अभिलाषी आयोजक का धर्मसंकट देखिए कि नवाब सिंह नागर भी डॉक्टर महेश शर्मा को आते देख कर अपना भाषण पूरा करके प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना तुरंत कार्यक्रम से चले गए । अब इससे पहले कि शहर में दोनों नेताओं के आपसी प्रेम पर भरपूर चर्चाएं होती, बैंक्विट हॉल में मौजूद एक लिफ्ट ने अपनी कुर्बानी देकर सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं के मनमुटाव की नकारात्मकता बेचारी लिफ्ट पर इतनी भारी पड़ी कि वह भाजपा नेताओं को लेकर ही खराब हो गई जिसमें 20 मिनट तक एक दुसरे की शकल न देखने वाले कई नेताओ को एक साथ रखे रही। बाद में पुलिस ने आकर सबको अलग अलग किया। फिलहाल कार्यक्रम किसी का हुआ, झगड़ा किसी के हुआ मगर पुलिस बैंक्विट हॉल मलिक को मुकदमे दर्ज करने के लिए खोज रही है नोएडा प्राधिकरण भी नोएडा क्षेत्र में बने गांव की आबादी पर बने इस प्राधिकरण बैंक्विट हॉल की लीगल होने के सारे कागज मंगवाने की तैयारी में है। हो सकता है भाजपा नेताओ को एक करने की साजिश में बैंक्विट हाल को तोड़ने बुलडोज़र भी आ ही जाए।
सत्ता के गलियारों की तीसरा समाचार मुख्य धारा की राजनीति से इतर जातीय राजनीति से है। नोएडा में ब्राह्मण और वैश्य राजनीति के अलावा तीसरा प्रभावशाली धड़ा पंजाबी राजनीति का है। समाजवादी पार्टी से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक के नेताओं ने अपने-अपने पंजाबी संगठन बना रखे हैं। इन्हीं में से एक संगठन में तीन दिन पहले बड़ा भूचाल आ गया जब रातों-रात “तारक मेहता के उल्टा चश्मा” की तरह संगठन के अध्यक्ष से जबरदस्ती त्यागपत्र लेकर नये अध्यक्ष का चुनाव किया गया। जयादा पता न चले तो एक मेहता गया दूसरा मेहता आ गया वाला खेल हुआ। इधर वालो ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति मीडिया को भेज दी तो उधर निष्कासित हुए अध्यक्ष ने भी तुरंत सारे पंजाबियों के एक फेडरेशन के नाम पर एक नए संगठन के अध्यक्ष के तौर पर अपनी प्रेस विज्ञप्ति की मीडिया को भेज दी। इधर पंजाबी समाज के लोगो ने दावा किया कि सारे पंजाबियों की फेडरेशन बनाने का खवाब देखने वाले मेंहता जी पर पहले भी छबील में लाखो के गबन के आरोप लग चुके है। आरोप सच हो या झूठ, पंजाबी समाज की राजनीतिक करने वालों की माने तो इस पूरे प्रकरण में जहां एक नेता हटाया गया वहीं दूसरे नेता को लाकर सब सही बताया ज़रूर जा रहा है किंतु इस सब में पंजाबी समाज के संगठनों की गुटबाजी और नेताओं की महत्वाकांक्षा से सामाज का राजनैतिक नुकसान जरूर हो गया है, जिसका असर राजनैतिक दलों की राजनीती में पंजाबी नेताओ की स्थिति पर पड़ना तय है।



