ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का ऐतिहासिक फैसला: किसानों के मुआवजे में 55.5% की रिकॉर्ड वृद्धि, 10 साल बाद 6 फीसदी आबादी भूखंड नीति बहाल

NCR Khabar News Desk
6 Min Read

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास और शहरी विस्तार की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) बोर्ड ने क्षेत्रीय किसानों के लिए एक नए युग की शुरुआत की है। शासन के निर्देशों के अनुपालन में, प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों की भूमि के मुआवजा दर में 55.5 प्रतिशत की एकमुश्त वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत मुआवजा दर को ₹4,125 प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर सीधा ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है—जो ग्रेटर नोएडा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी है।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

यह फैसला केवल वित्तीय मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि एक दशक से चले आ रहे नीतिगत गतिरोध को समाप्त करते हुए 6 फीसदी आबादी भूखंड देने के प्रावधान को पुनर्जीवित करता है, जिसे वर्ष 2016 में रद्द कर दिया गया था।

- Advertisement -
Ad image

मुख्य निर्णय और वित्तीय विवरण:

मुआवजा दरों में अभूतपूर्व उछाल: मौजूदा दर में ₹2,290 प्रति वर्ग मीटर की सीधी वृद्धि की गई है।
भूखंड विकल्प दर: जो किसान 6 फीसदी आबादी भूखंड का विकल्प चुनेंगे, उन्हें ₹5,725 प्रति वर्ग मीटर की दर से नकद मुआवजा दिया जाएगा। बिना भूखंड का विकल्प चुनने पर यह दर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर होगी।
त्वरित आवंटन व्यवस्था: अब किसानों को अपनी जमीन की रजिस्ट्री के समय ही आबादी भूखंड का ‘आरक्षण पत्र’ (Reservation Letter) सौंप दिया जाएगा, जिससे अनिश्चितता समाप्त होगी।
पृथक एवं अत्याधुनिक सेक्टर: आबादी भूखंडों के लिए अलग से सेक्टर विकसित किए जाएंगे। ये सेक्टर सामान्य आवासीय, औद्योगिक या बिल्डर सेक्टरों के समान विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होंगे।
पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया: अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) की अध्यक्षता में एक समर्पित ‘भूमि अधिग्रहण सेल’ का गठन किया जाएगा। भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित (DBT) किया जाएगा।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और डेटा विश्लेषण

ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण दरों का इतिहास देखा जाए तो यह निर्णय बुनियादी बदलाव का प्रतीक है। वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक मुआवजा दर ₹3,500 प्रति वर्ग मीटर पर स्थिर थी। इसके बाद वर्ष 2022-23 में ₹250 और 2023-24 में ₹375 की मामूली बढ़ोतरी की गई थी। लंबे समय से चल रही किसानों की असंतोषजनक स्थिति की तुलना में वर्तमान ₹2,290 की एकमुश्त वृद्धि प्राधिकरण की नीतिगत प्राथमिकताओं में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है।

- Advertisement -
Ad image

वित्तीय वर्ष मुआवजा दर (प्रति वर्ग मीटर) बदलाव/वृद्धि

2014-15 से 2021-22 ₹3,500 –
2022-23 ₹3,750 + ₹250
2023-24 ₹4,125 + ₹375
वर्तमान स्वीकृत दर ₹6,415 + ₹2,290 (55.5% वृद्धि)

प्रशासनिक ढांचा और अन्य प्रोत्साहन:

आबादी भूखंड का आकार: भूखंडों का न्यूनतम क्षेत्रफल 40 वर्ग मीटर और अधिकतम क्षेत्रफल 2,500 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है।
परिसंपत्तियों का अतिरिक्त मुआवजा: अधिग्रहीत भूमि पर स्थित पेड़ों, कुओं, या अन्य ढांचागत परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कर अलग से मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्य मार्गों के किसानों को वरीयता: प्रमुख संपर्क मार्गों (Primary Corridors) से सटी भूमि देने वाले किसानों को आबादी भूखंडों के चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।

एनसीआर खबर दृष्टिकोण और विश्लेषण

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह कदम सिर्फ एक ‘राहत पैकेज’ नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को संतुलित करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सीईओ एनजी रवि कुमार की एक दूरदर्शी रणनीति है। बीते कुछ वर्षों में नोएडा-ग्रेटर नोएडा और आगामी जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास जिस गति से बुनियादी ढांचे और औद्योगिक कॉरिडोर (जैसे डेटा सेंटर, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग) का विकास हुआ है, उसकी तुलना में भूमि अधिग्रहण अक्सर विधिक और सामाजिक अड़चनों में उलझ जाता था।

वर्ष 2016 में 6 प्रतिशत आबादी भूखंड की व्यवस्था समाप्त करने से किसानों और प्राधिकरण के बीच विश्वास की कमी पैदा हुई थी। विकास परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन में भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा था। प्राधिकरण ने यह समझ लिया है कि किसानों को केवल एकमुश्त वित्तीय भुगतान देकर उन्हें उनकी मूल संपदा से बेदखल करना एक दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

6 फीसदी आबादी भूखंड को अत्याधुनिक सेक्टरों के रूप में विकसित करने और रजिस्ट्री के साथ ही आरक्षण पत्र देने का निर्णय किसानों को क्षेत्र की भावी आर्थिक समृद्धि में वास्तविक ‘शेयरहोल्डर’ बनायेगा। पृथक विकसित सेक्टरों में बुनियादी ढांचा बेहतर होने से इन भूखंडों का बाजार मूल्य तेजी से बढ़ेगा, जिससे किसानों को स्थायी आय और सुरक्षा मिलेगी।

यह निर्णय न केवल लंबे समय से लंबित मुकदमों और विरोध प्रदर्शनों को समाप्त करेगा, बल्कि निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत को भी एक स्पष्ट संदेश देगा कि ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक और ढांचागत परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अब एक विवाद-मुक्त और पारदर्शी प्रक्रिया बनने जा रही है।

Share This Article
एनसीआर खबर दिल्ली एनसीआर का प्रतिष्ठित हिंदी समाचार वेब साइट है। एनसीआर खबर में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय,सुझाव और ख़बरें हमें mynews.ncrkhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं या 09654531723 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I अपना सूक्ष्म सहयोग आप हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : 9654531723@paytm के जरिये दे सकते है