नोएडा प्राधिकरण का नया दांव: सार्वजनिक शौचालयों के लिए PPP मॉडल, सफाई से 90 करोड़ की कमाई का लक्ष्य या निजी कंपनियों के लिए बनाया जा रहा ‘मुनाफे का खेल’?

आशु भटनागर
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आशु भटनागर I नोएडा प्राधिकरण वर्तमान में अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। शहर की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसी कहावतें चरितार्थक हो रही हैं। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने शहर के सार्वजनिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी एजेंसियों को सौंपने की तैयारी पूरी कर ली है। प्राधिकरण का दावा है कि इस कदम से अगले 10 वर्षों में उसे लगभग 90 करोड़ रुपये की आय होगी।

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प्राधिकरण का तर्क: कम खर्च में बेहतर सुविधा

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के अनुसार नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एस.पी. सिंह का दावा है कि इस नए मॉडल से प्राधिकरण पर किसी भी तरह का वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। निजी हाथों में जाने से शौचालयों की गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार होगा।

योजना के तहत, नोएडा में मौजूद कुल 256 सार्वजनिक शौचालयों को विभिन्न चरणों में आवंटित किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 150 शौचालयों को शामिल किया गया है, जिनसे आगामी 10 वर्षों में 9 करोड़ रुपये सालाना (कुल 90 करोड़ रुपये) की आय का अनुमान है। इस व्यवस्था के तहत निजी कंपनियों को शौचालयों के आसपास विज्ञापन प्रदर्शित करने का अधिकार मिलेगा। इसके बदले में, वे न केवल विज्ञापन शुल्क प्राधिकरण को देंगे, बल्कि शौचालयों की सफाई, सुरक्षा (गार्ड की तैनाती), बिजली-पानी और मरम्मत का पूरा खर्च भी वहन करेंगे।

दावों के उलट धरातल की हकीकत

प्राधिकरण जहां इस योजना को ‘रेवेन्यू जेनरेटिंग मॉडल’ और शहर के कायाकल्प के रूप में देख रहा है, वहीं जानकारों और स्थानीय निवासियों का अनुभव इसके ठीक विपरीत है। शहर में चर्चा है कि ऐसी योजनाएं अक्सर सरकारी संपत्ति पर निजी कंपनियों की तिजोरी भरने का जरिया मात्र बनकर रह जाती हैं।

इससे पहले भी नोएडा में पीपीपी मॉडल पर शौचालयों का निर्माण और प्रबंधन निजी कंपनियों को सौंपा गया था, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहे। स्वच्छ भारत अभियान के दौर में भी इन केंद्रों की जमीनी स्थिति बदतर बनी हुई है। यक्ष प्रश्न ये भी है कि 256 सार्वजनिक शौचालयों में जिन 150 शौचालयों को पहले देने की बात हो रही हैं, क्या विज्ञापन की विजिबिलिटी लोकेशन के नाम पर चयनित नहीं कए गए है ? क्योंकि अक्सर देखा गया है पीपीपी मोडल में निजी कम्पनी विज्ञापन की विजिबिलिटी के आधार पर ही टेंडर में रूचि दिखाती है। निजी एजेंसियों का प्राथमिक ध्यान विज्ञापन से मोटी कमाई करने पर रहता है, जबकि स्वच्छता और सुविधाओं को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। यहाँ तक कि इन केंद्रों पर तैनात केयरटेकरों और सफाई कर्मचारियों को महीनों तक वेतन नहीं मिलने की खबरें भी आम हैं।

पुरानी विफलताओं से डर: ई-साइकिल और पार्किंग का सबक

नोएडा के प्रबुद्ध वर्ग और पेशेवरों के बीच इस बात को लेकर गहरा संदेह है कि क्या यह योजना भी ‘ई-साइकिल’ या ‘मल्टी-लेवल पार्किंग’ प्रोजेक्ट्स जैसा हश्र तो नहीं देखेगी। आपको बता दें कि ई-साइकिल प्रोजेक्ट के तहत कंपनियों ने लंबे समय तक स्टैंड्स पर विज्ञापन लगाकर करोड़ों कमाए, लेकिन आम जनता को ई-साइकिल की सुविधा कभी सुचारू रूप से नहीं मिल सकी। आज ये स्टैंड केवल विज्ञापनों के बोर्ड बनकर रह गए हैं।

वही नोएडा के दिल कहे जाने वाले sector 18 और बोटनिकल गार्डन में करोडो की लागत से बनी मल्टी-लेवल पार्किंग को लेकर भी कड़वा अनुभव रहा है। आम जनता के लिए बनाई गई इन पार्किगों का बड़ा हिस्सा पुरानी कर बेचने वाली कम्पनियों, कैब एग्रीगेटर्स और बड़े कॉर्पोरेट होटलों की पार्किंग में तब्दील हो गया है। नतीजा यह है कि जब कोई साधारण नागरिक अपनी गाड़ी लेकर वहां पहुंचता है, तो उसे अक्सर ‘पार्किंग फुल’ के बोर्ड मिलते हैं और करोडो रूपए मल्टी-लेवल पार्किंग में बर्बाद करने के बाबजूद पुरे सेक्टर 18 में पार्किंग के लिए फिर से सडको के किनारे भी टेंडर कर दिए जाते है।

ऐसे में सार्वजानिक शौचालयों को लेकर नोएडा प्राधिकरण का यह कदम कागजों पर तो काफी प्रभावशाली और फायदेमंद नजर आता है, लेकिन पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि उचित निगरानी के अभाव में पीपीपी मॉडल केवल निजी लाभ का साधन बन जाता है। क्या प्राधिकरण इस बार कड़े नियम और निगरानी तंत्र लागू करेगा, या फिर शहर के सार्वजनिक शौचालय केवल विज्ञापनों के ‘होर्डिंग स्टैंड’ बनकर रह जाएंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे