ग्रेटर नोएडा। अवैध अतिक्रमण, अवैध होर्डिंग, विज्ञापन पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अर्बन विभाग की लापरवाही कोई नहीं बात नहीं है I हाल में ही ई बसों के शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा में बरसों पुराने बस शेल्टरों के जीर्णोद्धार की खबरें अभी सुर्खियों में ही थीं कि ग्रेटर नोएडा में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और निजी संस्थानों दोनों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए फेलिक्स हॉस्पिटल (Felix Hospital (Gamma 1, Greater Noida) पर बस शेल्टरों पर अवैध रूप से विज्ञापन लगाने के जुर्म में ₹10 लाख का भारी जुर्माना लगाया है।
जानकारी के अनुसार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधीन, बरसों से उपेक्षित पड़े बस शेल्टरों पर अर्बन विभाग का कोई ध्यान नहीं था। इस अनदेखी का फायदा उठाकर आउटडोर विज्ञापन माफियाओं ने इन पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया और लगातार विज्ञापन चलाए जाने लगे। इसी क्रम में, नोएडा के कथित तोर पर प्रतिष्ठित फेलिक्स हॉस्पिटल ने भी बीटा-1 से जगत फार्म के बीच स्थित दो बस शेल्टरों पर अवैध रूप से दो आउटडोर विज्ञापन लगा दिए थे।
जब यह मामला प्राधिकरण में शिकायत तक पहुंचा, तो प्राधिकरण ने त्वरित एक्शन लेते हुए फेलिक्स हॉस्पिटल को दोनों बस शेल्टरों के लिए ₹5-5 लाख यानी कुल ₹10 लाख के अर्थदंड का नोटिस जारी कर दिया है।
अस्पताल की नैतिकता और विज्ञापन की आवश्यकता पर प्रश्नचिह्न
इस पूरे प्रकरण ने जहां एक ओर स्वयं को सेवा कार्यों में संलिप्त बताने वाले फेलिक्स हॉस्पिटल की नैतिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, वहीं प्रचार के लिए इस तरह अवैध तरीकों का सहारा लेने से निजी अस्पतालों द्वारा ‘सेवा’ के दावों की सच्चाई भी सामने आ गई है। बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर क्षेत्र में अस्पतालों को इतने बड़े-बड़े और अवैध विज्ञापन लगाने की आवश्यकता क्या है, जब उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों की सेवा करना है? एनसीआर खबर ने इस प्रकरण पर फेलिक्स हॉस्पिटल के मालिक डॉ. डीके गुप्ता से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का अर्बन विभाग भी कठघरे में
यह घटना ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अर्बन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रश्न यह है कि आखिर प्राधिकरण की अनुमति के बिना अब तक इन बस शेल्टरों पर कितने होर्डिंग्स लगते रहे हैं और इसके जरिए प्राधिकरण को कितना राजस्व का नुकसान हुआ है? प्राधिकरण के अपने ही बनाए बस शेल्टरों पर अक्सर उनकी खराब व्यवस्था और रखरखाव के आरोप लगते रहे हैं, जिस पर अर्बन विभाग हमेशा सफाई देता रहा है। लेकिन, क्या ये अवैध होर्डिंग्स प्राधिकरण के अधिकारियों की सहमति से लग रहे थे या फिर प्राधिकरण के अधिकारियों को बस शेल्टरों पर चलने वाले इस गोरखधंधे का कुछ पता ही नहीं था?
क्या सिर्फ एक अस्पताल पर पेनल्टी लगा देने से प्राधिकरण के अर्बन विभाग की जिम्मेदारियां समाप्त हो गई हैं? आखिर इन बस शेल्टरों के लिए एक स्पष्ट विज्ञापन पॉलिसी अब तक क्यों नहीं बनाई गई? प्राधिकरण का अर्बन विभाग और कितने ऐसी जगहों पर प्राधिकरण के राजस्व का नुकसान करवा रहा है, यह एक गहन जांच का विषय है। इस घटना ने ग्रेटर नोएडा में प्रशासन की निगरानी और राजस्व प्रबंधन में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की ज़ुरुरत है।



