राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद गौतमबुद्धनगर में जिला मुख्यालय व तहसील स्तर पर राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस वृहद लोक अदालत का आयोजन माननीय जनपद न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अध्यक्षता एवं कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ विगत दिवस जनपद न्यायालय के सभागार में माननीय जनपद न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर जनपद के समस्त न्यायिक अधिकारीगण के साथ-साथ जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
रिकॉर्ड 10 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव व अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) विरेक अग्रवाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कुल 10,08,279 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें प्री-लिटिगेशन के कुल 9,31,325 मामलों का निपटारा शामिल है।
विभागवार और श्रेणीवार निस्तारित किए गए मामलों का विवरण इस प्रकार है:
न्यायालयी वाद: जनपद न्यायालय में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों द्वारा कुल 76,954 वादों का निस्तारण किया गया।
यातायात विभाग: सबसे अधिक 4,00,263 मामलों का निपटारा किया गया।
चिकित्सा विभाग: चिकित्सा विभाग के अंतर्गत 1,00,045 मामलों का निस्तारण हुआ।
जिलाधिकारी अधीनस्थ विभाग: इस श्रेणी के अंतर्गत कुल 4,76,181 मामलों का निपटारा किया गया।
पुलिस विभाग: पुलिस विभाग द्वारा कुल 32,089 मामलों का निस्तारण किया गया।
श्रम न्यायालय: श्रम न्यायालय द्वारा 1,102 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें कुल 4,19,23,189 रुपये की समझौता धनराशि शामिल है।
बैंक ऋण मामले: बैंकों से जुड़े 245 मामलों का निस्तारण कर कुल 3,61,57,241 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
विद्युत विभाग (UPPCL व NPCL): यूपीपीसीएल के 5,931 मामले और एनपीसीएल के 35 मामलों (समझौता राशि 4,85,000 रुपये) का निपटारा हुआ।
नोएडा प्राधिकरण: नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कुल 5,160 मामलों का निस्तारण किया गया।
कमर्शियल कोर्ट (प्री-लिटिगेशन): इसके अंतर्गत 221 मामलों का निस्तारण हुआ।
अन्य विभाग: बीएसएनएल के 51 मामलों में 1,52,206 रुपये और फाइनेंस कंपनियों के 06 मामलों में 39,670 रुपये की वसूली की गई।
न्यायालयवार निस्तारण का विवरण
लोक अदालत के दौरान विभिन्न न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मामलों का निपटारा किया गया:
- माननीय जिला जज अतुल श्रीवास्तव द्वारा 04 वादों का निस्तारण किया गया।
- मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी वत्सल श्रीवास्तव द्वारा 43 वादों का निस्तारण कर 4,40,89,000 रुपये की समझौता राशि तय की गई।
- वाणिज्य न्यायालय-प्रथम के पीठासीन अधिकारी रविन्द्र नाथ दुबे द्वारा 13 वाद (समझौता राशि 1,07,01,459 रुपये) और वाणिज्य न्यायालय-द्वितीय के पीठासीन अधिकारी जगदीश प्रसाद द्वारा 20 वाद (समझौता राशि 1,04,24,099 रुपये) निस्तारित किए गए।
- अपर जिला जज (पोक्सो कोर्ट-द्वितीय) कुमार गौरव ने 580 वादों का निस्तारण कर 1,15,10,250 रुपये का जुर्माना वसूल किया।
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिकेष पाण्डेय द्वारा 3,360 वादों का निस्तारण कर 10,42,973 रुपये जुर्माना वसूला गया।
- अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम मयंक त्रिपाठी ने 2,040 वाद (जुर्माना 1,07,200 रुपये) तथा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय विरेक अग्रवाल ने 921 वाद (जुर्माना 62,800 रुपये) निस्तारित किए।
- सिविल जज सी.डी. प्रथम सुमित कुमार ने 892 वाद और सिविल जज जू.डी. (चतुर्थ) अंकिता सिंह व वर्चुअल कोर्ट द्वारा क्रमशः 43 और 63,103 वादों का निस्तारण कर कुल 10,06,400 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
- प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री चन्द्रप्रकाश तिवारी द्वारा पारिवारिक विवादों से जुड़े 62 वादों का निपटारा किया गया। इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सीमा सिंह द्वारा 30 वादों का निस्तारण हुआ।
- भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुर्नव्यवस्थापन प्राधिकरण के सुनील कुमार श्रीवास्तव द्वारा 55 वादों का निस्तारण किया गया।
इसके अलावा, विभिन्न अपर जिला जजों, सिविल जजों और मानद मजिस्ट्रेटों द्वारा भी बड़ी संख्या में वादों का निस्तारण कर आम जनता को त्वरित न्याय प्रदान किया गया। विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, इस वृहद आयोजन से न केवल अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम हुआ है, बल्कि वर्षों से जारी आपसी विवादों का भी सौहार्दपूर्ण अंत हुआ है।






