आशु भटनागर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद आउटर नोएडा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते औद्योगिक विकास के दावे किये जा रहे है और इन्ही सब के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर एक अजीबोगरीब ‘लुका-छिपी’ का खेल चल रहा है। यमुना प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे के कंसेशनयर (विकासकर्ता) कम्पनी के बीच जारी इस रस्साकशी ने आम जनता, उद्यमियों और कामगारों की कमर तोड़ दी है। स्थिति यह है कि प्राधिकरण जहाँ विकास के लिए रैंप बना रहा है, वहीं एक्सप्रेसवे प्रबंधन उन पर टोल प्लाजा लगाकर अपनी कमाई सुनिश्चित कर रहा है।
सुविधा के लिए बने रैंप, बन गए कमाई का जरिया
यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर प्लाजा से पहले 11, 12, 15, 16, 26 और 36 किलोमीटर के आसपास 0.639 किलोमीटर तक पांच प्रमुख रैंप बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य स्थानीय औद्योगिक क्षेत्रों में जाने वाले उद्यमियों और कामगारों को सुगम मार्ग देना था। परंतु, एक्सप्रेसवे प्रबंधन ने इन पर टोल प्लाजा स्थापित कर दिए हैं। नतीजा यह है कि जिस सुविधा के लिए प्राधिकरण ने करोड़ों खर्च किए, उसकी उपयोगिता उद्यमियों और आम आदमी के लिए लगभग शून्य हो गई है।
इस पुरे खेल में महत्वपूर्ण पक्ष ये है कि यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण के समय इसे बस डेल्ही आगरा के बीच आवाजाही के लिए बनाया गया था तब न तो यहाँ एअरपोर्ट की योजना थी न ही फिल्म सिटी या औधोगिक क्लस्टर की कोई योजना I 2017 में यहाँ अपेरल पार्क की योजना के बॉस अन्य 11 औधोगिक क्लस्टर बनाये गए हैं , गंगा एक्सप्रेसवे फिल्म सिटी और एअरपोर्ट के आने से इस टोल पर दिल्ली आगरा के समय प्रोजेक्टेड यातर के बनिस्पत यातायात 50 गुना बढ़ जाएगा और आउटर नोएडा शहर में फिल्मसिटी, एअरपोर्ट या उधोगो में काम करने के लिए उतरने वाले लोगो केअलावा भी टोल कम्पनी के पास कमी का बहुत मौका है। यमुना प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र भाटिया भी एअरपोर्ट के आस पास किसी भी प्रकार के टोल न होने के सैधांतिक अप्रूवल की बात कहते है I उत्तर प्रदेश सरकार भी अपने निवेशको को यहाँ टोल फ्री आवाजाही के साथ हैसल फ्री वातातावरण का दावा करती है पर मोटी कमाई के लिए एक कम्पनी की जिद सब समाप्त कर देती है।
‘कागजी लड़ाई’ और सीईओ की विफलता
देखा जाए तोइस पूरे प्रकरण में यमुना प्राधिकरण और एक्सप्रेसवे प्रबंधन के बीच पत्रों का आदान-प्रदान एक रस्म अदायगी बनकर रह गया है। प्राधिकरण प्रबंधन इसे ‘कंसेशन एग्रीमेंट’ का उल्लंघन बताकर हटाने का पत्र भेजता है, तो कंसेशनयर उसी समझौते का हवाला देकर टोल को जायज ठहराते हुए पत्रों को ठंडे बस्ते में डाल देता है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह और उनकी टीम इस विवाद में पूरी तरह ‘बेबस’ नजर आ रही है। प्राधिकरण की विफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक्सप्रेसवे प्रबंधन द्वारा पत्रों को ‘कूड़ेदान’ में डालने के बाद, सीईओ का ध्यान अब सर्विस रोड को जल्द पूरा करने पर है, ताकि टोल के सवालों से बचा जा सके।
नोएडा के समाजसेवी सुखदेव शर्मा ने इसके विरुद्ध आवाज़ उठाते हुए कहा कि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद इस मार्ग पर यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। यदि यही ‘टोल-रैंप’ मॉडल जारी रहा, तो भविष्य में यह क्षेत्र जाम का केंद्र बन जाएगा।
नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के चेयरमैन ललित ठुकराल ने भी इस टोलप्लाजा पर वसूली का विरोध जताया है उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अभी से टोल लगाने से निवेशको और उधोगपतियो के लिए खर्च बढ़ जाएगा I पहली से ही महंगाई से परेशान मजदूर या कर्मचारी 160 रूपए प्रतिदिन टोल कैसे देगा ? ऐसा रहा तो यहाँ आये दिन विवाद होंगे, नोएडा समेत पुरे गौतम बुद्ध नगर जिले के तीनो प्राधिकरण क्षेत्र में अब और विवाद नहीं चाहिए नहीं तो यहाँ से उधोग पलायन करने लगेंगे।
समाजसेवी और ट्रांसपोर्ट उधोगपति जोगिन्दर सिंह का कहना है कि सीईओ की बेबसी और प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा अंततः उस उद्यमी और आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है, जो विकास की इस नई इबारत का हिस्सा बनना चाहता है।
फिल्म सिटी प्रोजेक्ट और भविष्य का संकट
विवाद की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब हम भविष्य की ओर देखते हैं। फिल्म सिटी के लिए भाईपुर गांव के पास दो नए रैंप प्रस्तावित हैं, जो तीन-तीन लेन के होंगे। दरअसल अभी तक यमुना एक्सप्रेसवे से फिल्म सिटी को सीधे जोड़ने के लिए कोई रैंप नहीं है। ऐसे में एक्सप्रेसवे पर जीरो पॉइंट से 21 किलोमीटर पर दोनों तरफ रैंप बनाने का निर्णय लिया गया था। ये रैंप करीब 480 मीटर लंबे और 11 मीटर चौड़े होंगे। फरवरी 2025 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो भूमि विवादों के चलते कुछ समय रुकी रही, लेकिन अब इसे पुनर्जीवित किया जा रहा है। मजे की बात यह है कि रैंप अभी बने भी नहीं हैं, और एक्सप्रेसवे प्रबंधन ने इन पर भी टोल प्लाजा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि सेक्टर-21 में करीब एक हजार एकड़ में अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी बनाना प्रस्तावित है। इसका पहला चरण 230 एकड़ में विकसित होगा, जिसके लिए बेव्यू भूटानी को कांट्रेक्ट मिला है, बीते एक वर्ष से इसके शिलान्यास के कई दावे किये गए हैं किन्तु अब सीईओ राकेश कुमार सिंह का दावा है कि मई या जून तक इसका शिलान्यास हो जाएगा।
बहराल यमुना प्राधिकरण के नए निर्माण और एक्सप्रेसवे प्रबंधन की टोल वसूली की यह प्रतिस्पर्धा सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर डाका है। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार यमुना प्राधिकरण में विकास के बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी ओर यमुना एक्सप्रेसवे प्रबंधन उसे वसूली का अड्डा बना रहा है। इस खींचतान के बीच न केवल यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह की साख दांव पर लगी है, बल्कि जनता का विश्वास भी टूट रहा है। क्या सरकार इस ‘टोल-रैंप’ के जाल को सुलझा पाएगी, या जनता ऐसे ही पिसती रहेगी?


