उत्तर प्रदेश में ‘डिजिटल जनगणना 2027’ की तैयारी: 5.50 लाख कर्मियों की फौज जुटाएगी डेटा, जानें पूरा कार्यक्रम

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लखनऊ डेस्क । उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी को डिजिटल नक्शे पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी व आईएएस शीतल वर्मा ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी ‘जनगणना 2027’ के विस्तृत रोडमैप की घोषणा कर दी है। देश की यह 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि पहली बार इसे पूरी तरह ‘पेपरलेस’ और डिजिटल स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

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दो चरणों में होगा महाभियान

आईएएस शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया कि जनगणना के इस वृहद कार्य को दो चरणों में वर्गीकृत किया गया है:

मकानों का सूचीकरण (House Listing): जनगणना की शुरुआत मकानों की गणना से होगी। इसके लिए ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का अभिनव विकल्प दिया गया है। नागरिक 7 मई 2026 से 21 मई 2026 तक स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद, 22 मई से 30 जून 2026 तक फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर सत्यापित डेटा का संकलन करेंगे।
जनसंख्या की वास्तविक गिनती: मकानों के डेटाबेस के आधार पर, फरवरी 2027 में दूसरे चरण के तहत वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी।

5.50 लाख कर्मियों की विशेष तैनाती

इस विशाल प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए सरकार ने 5.50 लाख कर्मियों की फौज तैयार की है। इन्हें विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए देश भर में 8 नेशनल ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं, जो प्रदेश स्तर पर डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और सुरक्षा का संगम

1872 में शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया के इतिहास में यह पहला अवसर है जब नागरिक अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से स्वयं साझा कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, पहले चरण में रक्षा (Defense) क्षेत्रों को गणना से बाहर रखा गया है, जिन्हें दूसरे चरण में शामिल किया जाएगा। यह डेटा भविष्य में राजस्व ग्रामों की ‘आबाद’ और ‘गैर-आबाद’ स्थिति निर्धारण के लिए आधार बनेगा।

समयबद्ध रणनीति और व्यापक प्रचार

प्रशासनिक स्तर पर 10 मई 2026 तक सभी तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। आईएएस शीतल वर्मा ने बताया कि आम नागरिकों को इस डिजिटल बदलाव से जोड़ने के लिए व्यापक जन-जागरूकता और प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा।

यह डिजिटल जनगणना न केवल प्रदेश की विकास योजनाओं को सटीक दिशा देने में मददगार साबित होगी, बल्कि ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी होगी। सरकारी अधिकारियों और नीति निर्माताओं के लिए यह डेटा आने वाले दशकों में सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण में आधारस्तंभ कार्य करेगा।

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