ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में आज उस समय प्राधिकरण के पीजीएम संदीप चंद्रा के विरुद्ध नारे लग गए जब लोगो ने पीगीएम के दुर्वयवहार को लेकर विरोध जताया। दरअसल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवारा कुत्तो की समस्या पर महागुन मायवुड के निवासियों की शिकायत पर निवासियों को बातचीत करने के लिए बुलाया गया था। इस बैठक में प्राधिकरण के पीएम संदीप चंद्रा के साथ-साथ spca और डॉग फीडर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे । महागुण मायवुड से आए लोगों ने कथित डॉग फीडर की मनमानी पर अपना रोष और शिकायत बताते हुए डॉग फीडर्स के कार्यकलापों के बारे में बताना शुरू किया ओर सोसाइटी में फीडर्स के कार्यकलापों को लेकर आपत्ति जताई इस पर एसपीसीए की एक प्रतिनिधि में सुबह 4:00 बजे डॉग फाइटर के लिए टाइम स्लॉट निश्चित करने का प्रस्ताव दिया जिस पर समिति के लोगों ने यह कहकर ऑब्जेक्शन जताया सोसाइटी एक्ट के अनुसार किसी भी सोसाइटी में प्रस्तावित नक़्शे के अनुरूप भी कोई नया निर्माण नहीं किया जा सकता है ऐसे में प्राधिकरण अगर फोर्सफुली किसी भी तरीके के फीडिंग पॉइंट समिति के अंदर बनाने की बात करता है तो वह लीगली गलत है।
महागुण मायवुड सोसाइटी के लोगों ने मेंटेनेंस डिपार्टमेंट द्वारा चिह्नित किए गए 16 स्ट्रीट डॉग्स को सोसाइटी में रहने देने पर सहमति जाताई, किंतु इस पर एसपीसीए के अधिकारी ने दोबारा सेंसस करने की बात रख दी जिसके बाद हंगामा हो गया। लोगों ने इसको गलत बताया तो प्राधिकरण के पीजीएम बैठक बीच में छोड़कर चले गएI
बैठक में समिति की तरफ से आई एक महिला वकील ने उनसे उनके केबिन में बात करनी शुरू करी किंतु आरोप है कि थोड़ी देर में पीएम संदीप चंद्रा महिला पर अपना आपा खो बैठे और उन्होंने बाहर जाने को कह दिया इसके बाद वहां आई सभी महिलाओं ने संदीप चंद्रा की इस हरकत पर प्राधिकरण के अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध प्रकट किया और संदीप चंद्रा से अपनी हरकत के लिए माफी मांगने को कहाI संदीप चंद्रा उसके बाद वहां से उठ कर चले गए । बाद में वहां से लोगों को ले जाया गया और उनकी बैठक ओएसडी गिरीश कुमार झा से कराई गई ।समाचार लिखे जाने तक इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल कोई स्पष्ट निर्देशों की जानकारी नहीं है।
सरकार बदली पर नहीं बदल रहा अधिकारियो का लालफीताशाही वाला रवैया!
अपनी शिकायतों को लेकर आये महिलाओं और बुजुर्ग निवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पीजीएम के लाल फीता शाही वाले वयवहार को गलत बताते हुए कहा कि बीते 10 वर्षो में प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं को जनता का सेवक बताते रहे हैं और अधिकारियो से भी जनता के समक्ष उसी तरह से पेश आने के निदेश देते रहे हैं किन्तु अभी भी कई अधिकारी अग्रेजो के ज़माने से चली आ रही मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे है और जनता के साथ मालिको जैसा वयवहार कर रहे हैं।
प्राधिकरण का रवैया खानापूर्ति, SPCA को नहीं पता शहर में कितने आवारा कुत्ते ?
इस पूरे ही प्रकरण में जहां एक और निवासियों का आक्रोश चरम पर दिखा वही निवासियों के साथ बैठक ले रहे अधिकारियों का उद्देश्य निवासियों की समस्याओं से अधिक उनको डॉग फीडर्स के अनुरूप कार्य करने के लिए निर्देशित करने पर रहा । एसपीसीए के अधिकारी भी यह बताने में नाकाम रहे कि इतने वर्षों से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में सोसाइटी वाइस कितने स्ट्रीट डॉग्स हैं और कितनों का वैक्सीनेशन हो चुका है।दुखद तथ्य है ये कि वैक्सीनेशन करने वाली संस्था HCL फाउंडेशन की प्रतिनिधि के पास भी इस सब को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी, ऐसे में लोगो से आवारा कुत्तो से मीटिंग करने वाले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एसपीसीए और क्षेत्र में वैक्सीनेशन के लिए काम कर रही स्वयंसेवी संस्था सभी लोग खाली हाथ थे।

पूरी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भले ही कुछ भी दावा करती हो किंतु प्राधिकरण, प्रशासन इन सब बातों को लेकर फिलहाल किसी योजना पर कार्य नहीं कर रहा है । प्राधिकरण की ओर से गौशाला और आवारा कुत्तों की योजनाओं पर काम कर रहे आर के भारती के अनुसार फिलहाल तीन डॉग शेल्टर और एक डॉग सेंटर की योजना पर कार्य चल रहा है । यद्यपि ये कब तक अस्तित्व में आएंगे इस पर कह पाना मुश्किल है ।
ऐसे में कितने और लंबे समय तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र के निवासियों को आवारा कुत्तों की समस्याओं के साथ-साथ डॉग फीडर्स की मनमानी से संघर्ष करना पड़ेगा यह समय ही बताएगा ।


