आशु भटनागर । अप्रैल में नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स स्थित रिचा ग्लोबल में वेतन बढ़ोतरी और अन्य मांगों को लेकर पुरे नोएडा में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में एक बड़ा षड्यंत्र बाहर निकल कर आ गया है। फेज दो कोतवाली पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर करीब 1500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है, जिसमें 77 गवाहों के बयान शामिल हैं। पुलिस की इस विवेचना से न केवल एक हिंसक घटना के अपराधियों का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि इसके पीछे नोएडा के औद्योगिक परिदृश्य में अस्थिरता पैदा करने की एक गहरी और संगठित साजिश का भी खुलासा हुआ है।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में रूपेश राय, आकृति और मनीषा समेत वर्तमान में जेल में बंद 10 आरोपियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश करने का दावा किया है। जांच में तीन और नाम—प्रियमबदा शर्मा, प्रेरित लोढ़ा और योगेश मीना—सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी जल्द होने की संभावना है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह पुष्टि हुई है कि आरोपी 9 अप्रैल से 13 अप्रैल तक घटना स्थल पर मौजूद थे और श्रमिकों को हड़ताल के लिए उकसा रहे थे।
षड्यंत्र का पर्दाफाश: ‘उद्योगबंदी’ का मास्टरप्लान
पुलिस जांच में जो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि यह केवल एक साधारण श्रमिक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि अर्बन नक्सल का औद्योगिक इकाइयों में अपना वर्चस्व स्थापित करने और उद्योग को अपने ‘घुटनों पर लाने’ की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस ‘कोर ग्रुप’ का एक स्पष्ट कार्य विभाजन था: कोई फंड जुटाता, कोई कानूनी मदद देता, तो कोई इंटरनेट मीडिया पर माहौल बनाता।
रणनीति स्पस्ट थी, पहले छोटे विरोध प्रदर्शनों के जरिए माहौल गर्म करना, फिर उत्पादन पूरी तरह से ठप करना और अंततः पूरे शहर के उद्योगों को ‘लॉक’ कर देना। इस कदम के पीछे की सोच यह थी कि जब उत्पादों के ऑर्डर रद्द होंगे और निर्यात रुकेगा, तब प्रबंधन दबाव में आकर उनकी शर्तों को मानने पर मजबूर हो जाएगा।

रूपेश राय का पुराना नेटवर्क, 2018 से सक्रिय ‘सरकार विरोधी’ आंदोलन
जांच में रूपेश राय की भूमिका और भी गहरी पाई गई है। पुलिस विवेचना में पता चला है कि रूपेश राय 2018 से विभिन्न संगठनों जैसे बिगुल मजदूर दस्ता, नौजवान भारत सभा, दिशा छात्र संगठन, स्त्री मुक्ति लीग और रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (RWPI) के बैनर तले इंटरनेट मीडिया पर ‘सरकार विरोधी’ सामग्री प्रसारित कर रहा था। उसके पिछले रिकॉर्ड में सितंबर 2014 में ‘स्त्री मुक्ति लीग’ और ‘नौजवान भारत सभा’ द्वारा मार्क्स-लेनिन समर्थित प्रचार, नवंबर 2017 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों को धरने के लिए बुलाना और अप्रैल 2019 में RWPI के लिए फंड जुटाना शामिल है। अगस्त 2025 में हरनंदी डूब क्षेत्र में जनता को भड़काकर प्रदर्शन कराए गए। अप्रैल 2026 में मानेसर जैसी हिंसक घटना दोहराने के लिए श्रमिकाें को उकसाया गया।
यह भी सामने आया है कि रूपेश राय ने ‘रिचा ग्लोबल’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसका एडमिन आदित्य आनंद था। आदित्य अपने आवास पर सह-आरोपियों के साथ मीटिंग कर नोएडा में हिंसा भड़काने की साजिश रचता था। सीडीआर में 10 और 11 अप्रैल को उसकी घटना स्थल पर मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
सामने आए नए नाम: भड़काऊ भाषण और दुष्प्रचार
विवेचना में सामने आए तीन नए आरोपी—प्रियमबदा शर्मा, प्रेरित लोढ़ा और योगेश मीना—पर भी आरोप है कि उन्होंने ‘सरकार विरोधी’ प्रदर्शनों में मुख्य भूमिका निभाई थी। इन पर भड़काऊ भाषण देने और इंटरनेट मीडिया पर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप है, जो अप्रैल की हिंसा के लिए जमीन तैयार करने में सहायक सिद्ध हुआ।
यह चार्जशीट नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक अधिकारों के नाम पर पनपने वाली एक गहरी साजिश को उजागर करती है, जहां कथित तौर पर कुछ ताकतें अराजकता फैलाकर अपनी मनमानी शर्तों पर औद्योगिक इकाइयों को चलाने का प्रयास कर रही थीं। अब यह मामला अदालती कार्यवाही में प्रवेश कर चुका है, और न्याय प्रणाली पर इस जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों को सजा दिलाने की जिम्मेदारी है।


