आशु भटनागर। वर्ष 2025 की चर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ का एक संवाद इन दिनों काफी चर्चा में है— “सत्ता को फिक्र सिर्फ कुर्सी की होती है।” रविवार, 21 जून को गौतम बुद्ध नगर में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहाँ एक ओर जिला प्रशासन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजनों में व्यस्त था, वहीं दूसरी ओर भविष्य की उम्मीद लिए नीट (NEET) की परीक्षा देने पहुंचे छात्रों के अभिभावक भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं से जूझते नजर आए।
नोएडा में ऐसे अधिकारी भरे पड़े हुए जिनको आम जनता से मतलब नहीं है ,
आज नोएडा के अलग अलग स्कूलों में NEET की परीक्षा थी ,
दोपहर में इतनी धूप थी और उसी धूप में बच्चों के मां बाप ऐसे ही परेशान थे पूरे दिन , न तो इनके धूप से बचने के लिए टेंट लगाई गई थी न ही पीने का पानी ,
नोएडा… pic.twitter.com/N6KZNwyh8x
— Mahender Mahi (@MahendrMahii) June 21, 2026
योग का उत्सव बनाम नीट का संघर्ष
21 जून का दिन जिले के आला अधिकारियों से लेकर स्थानीय नेताओं तक के लिए ‘योग दिवस’ के उत्सव के रूप में रहा। विडंबना यह रही कि इसी दिन देश भर में विवादों में घिरी नीट की पुनर्परीक्षा भी आयोजित हो रही थी। एक ओर जहाँ शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा प्रणाली को लेकर देश भर में राजनीतिक माहौल गर्म है, वहीं जमीनी स्तर पर अभिभावकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ा।
आरोप है कि जिले की जिलाधिकारी मेधा रूपम न केवल योग कार्यक्रमों में योग करती दिखीं, बल्कि उसके भव्य इंतजामों में भी व्यस्त रहीं। लेकिन जिले के विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा देने आए हजारों छात्रों के अभिभावकों के लिए स्कूलों के बाहर न तो छाया के लिए टेंट की व्यवस्था थी और न ही पीने के पानी का उचित प्रबंध।
प्रशासनिक दूरदर्शिता पर सवाल
जिले के अभिभावक के रूप में जिलाधिकारी का पद अत्यंत जिम्मेदारी भरा होता है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, 21 जून की चिलचिलाती धूप में अभिभावक घंटों सड़कों पर खड़े रहने को मजबूर थे। चर्चा यह भी है कि नेताओं को तो अपनी चुनावी जमीन और टिकट की चिंता रहती है, लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह आम जनता की तकलीफों का संज्ञान ले।

यह पहली बार नहीं है जब वर्तमान जिला प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। इससे पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की दुखद मृत्यु के समय भी ऐसी ही चर्चाएं आम हुई थीं। उस वक्त भी स्थानीय लोगों का मानना था कि यदि प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम समय रहते सक्रिय होती, तो युवराज को बचाया जा सकता था।

पुलिस की मुस्तैदी और पुराने जिलाधिकारी की याद
राहत की बात केवल इतनी रही कि नोएडा पुलिस के कुछ जवानों ने अपनी क्षमतानुसार व्यवस्थाएं बनाए रखने की कोशिश की, हालांकि वह प्रयास भीषण गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
इस अव्यवस्था के बीच जिले के नागरिकों को पूर्व जिलाधिकारी मनीष वर्मा की कार्यशैली याद आई। सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में लोगों ने कहा कि पूर्व जिलाधिकारी के समय में आम आदमी के दर्द को महसूस करने वाली प्रशासनिक संवेदनशीलता नजर आती थी। लोगों का मानना है कि जिले का मुखिया होना और आम जन की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से समझना, दो अलग-अलग बातें हैं।नोएडा में अब अधिकारी सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने में माहिर है बस
फिलहाल, गौतम बुद्ध नगर में योग दिवस के सफल आयोजन की तस्वीरें तो सरकारी फाइलों की शोभा बढ़ाएंगी, लेकिन परीक्षा केंद्रों के बाहर पसीने से तर-बतर अभिभावकों के चेहरे प्रशासन की ‘प्राथमिकताओं’ पर आत्मचिंतन का प्रश्न छोड़ गए हैं।


