नई दिल्ली। देश के सुप्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों और हालिया पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वांगचुक ने रविवार से देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और छात्र अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत सुधार शामिल हैं।
राजघाट से जंतर-मंतर तक की पदयात्रा अनशन पर बैठने से पूर्व, सोनम वांगचुक रविवार सुबह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल, राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने बापू को नमन कर अपने आंदोलन की नैतिक शुरुआत की। इस दौरान उनके साथ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और सौरव दास सहित कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। राजघाट से रवाना होने के बाद यह समूह जंतर-मंतर पहुंचा, जहां प्रदर्शन की अगली रूपरेखा साझा की गई।
किसान नेताओं को नजरबंद करने के दावे आंदोलन के बीच एक विवादित पक्ष भी सामने आया है। जंतर-मंतर पर एकत्र हुए कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई प्रमुख किसान नेताओं को उनके स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा नजरबंद किया गया है। अभिजीत दिपके के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि किसान नेता इस छात्र-समर्थक प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी भी आधिकारिक सरकारी सूत्र द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
खाप पंचायत और किसानों का समर्थन इस विरोध प्रदर्शन को अब व्यापक सामाजिक समर्थन प्राप्त हो रहा है। सीजेपी के प्रवक्ता दीपक बालियान ने जानकारी दी कि कई किसान संगठनों ने अपने बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए इस लड़ाई में शामिल होने का निर्णय लिया है। आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली में एक बड़ी खाप पंचायत आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है।

‘प्रधान गो बैक’ अभियान और छात्रों का असंतोष उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा 20 जून से निरंतर धरना दिया जा रहा है। सोनम वांगचुक के इस आंदोलन में शामिल होने से इस विरोध प्रदर्शन को और अधिक बल मिला है। वर्तमान में प्रदर्शनकारी छात्र, शिक्षक और विभिन्न नागरिक संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ ‘प्रधान गो बैक’ अभियान चला रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं के बीच भारी असंतोष पैदा किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और शिक्षा सुधार की बढ़ती मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।



