नई दिल्ली। दिल्ली के सत्ता के गलियारों में इन दिनों हलचल इतनी तेज है कि हर राजनीतिक चर्चा का केंद्र केवल एक ही बिंदु पर आकर टिक गया है—मोदी कैबिनेट में संभावित बड़ा फेरबदल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हालिया मुलाकातों के बाद इन अटकलों को और अधिक बल मिला है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और ‘लुटियंस दिल्ली’ के जानकारों का मानना है कि यह केवल धुआं नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे बड़ी बिसात बिछाई जा रही है।
शिक्षा मंत्रालय: क्या धर्मेंद्र प्रधान पर गिरेगी गाज?
इस संभावित फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर हो रही है। हाल के महीनों में नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों ने शिक्षा मंत्रालय को बैकफुट पर ला दिया है। विपक्ष के तीखे हमलों और छात्रों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन ने सरकार पर नैतिक दबाव बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जवाबदेही’ तय करने के लिए प्रधानमंत्री इस मंत्रालय में चेहरा बदल सकते हैं। चर्चाएं तो यहाँ तक हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी जा सकती है, ताकि उनकी प्रशासनिक पकड़ से इस विवादित क्षेत्र को पटरी पर लाया जा सके। हालांकि, संगठन से जुड़े किसी अन्य कद्दावर नेता के नाम पर भी विचार किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वित्त मंत्रालय: क्या शक्तिकांत दास होंगे नए ‘सारथी’?
सबसे चौंकाने वाली चर्चा देश के वित्त मंत्रालय को लेकर है। निर्मला सीतारमण, जिन्होंने लगातार रिकॉर्ड बजट पेश कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है, उनके भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सियासी गलियारों में एक नाम जो तेजी से उभर रहा है, वह है आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का।

दास को अर्थव्यवस्था की गहरी समझ और वैश्विक वित्तीय संकटों के दौरान उनके कुशल प्रबंधन के लिए जाना जाता है। यदि वे कैबिनेट में शामिल होते हैं, तो यह विशेषज्ञता आधारित ‘टेक्नोक्रेट’ नियुक्तियों की मोदी सरकार की परंपरा को आगे बढ़ाने जैसा होगा। हालांकि, आर्थिक स्थिरता और बजट के बाद के क्रियान्वयन के दौर में इतना बड़ा बदलाव एक जोखिम भरा कदम भी हो सकता है, जिस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री के विवेक पर निर्भर करेगा।
नितिन गडकरी: प्रदर्शन के बावजूद मंत्रालय में बदलाव?
हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री के सबसे सफल मंत्रियों में शुमार नितिन गडकरी का नाम भी इन चर्चाओं में शामिल है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में उनके द्वारा किए गए क्रांतिकारी कार्यों की प्रशंसा विपक्ष भी करता रहा है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नई ऊर्जा फूंकने के उद्देश्य से उनके पोर्टफोलियो में भी फेरबदल संभव है। सवाल यह उठता है कि क्या उन्हें किसी और भारी-भरकम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी या यह केवल अटकलों का एक हिस्सा है?
क्या है इस फेरबदल का वास्तविक उद्देश्य?
देखा जाए तो मोदी सरकार के लिए यह फेरबदल केवल मंत्रियों को बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2029 की लंबी रणनीति और वर्तमान प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान ढूंढने की कोशिश है। पेपर लीक जैसी घटनाओं ने सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया है, और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती उम्मीदों के बीच ‘परफ़ॉर्म या पेरिस’ (काम करो या जाओ) का सिद्धांत लागू होता दिख रहा है।
फिलहाल, ये सभी दावे सियासी अटकलों के तूफान की तरह हैं। मोदी सरकार अपनी चौंकाने वाली कार्यशैली के लिए जानी जाती है। क्या यह फेरबदल वाकई होगा या यह केवल एक मनोवैज्ञानिक खेल है? इस रिपोर्ट के अंत में यह कहना तर्कसंगत होगा कि यदि ये बदलाव होते हैं, तो यह न केवल सरकार का चेहरा बदलेंगे, बल्कि आने वाले समय की नीतिगत दिशा भी तय करेंगे। दिल्ली की नजरें अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अगले कदम पर टिकी हैं।



