बेलाग लपेट : भारत एक कृषि प्रधान नहीं मुफ्त खोरी प्रधान देश है, मुफ्त खोरी हमारा परम धर्म है या फिर यूं कहूं राष्ट्रीय चरित्र बन चुका है – आशु भटनागर

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। कई बार मुझे लगता है भारत एक कृषि प्रधान नहीं मुफ्त खोरी प्रधान देश है, मुफ्त खोरी हमारा परम धर्म है या फिर यूं कहूं राष्ट्रीय चरित्र बन चुका है । देश की सरकार 80 करोड लोगों को मुफ्त राशन देती है और सरकार के साथ साथ हम भी उस पर गर्व करते हैं । आप कहेंगे आज अचानक यह कौन सा राग भैरवी गाने लगा हूं ।

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दरअसल इस राग भैरवी के पीछे ग्रेटर नोएडा में किसान संगठनों द्वारा यमुना एक्सप्रेस वे पर मिलने वाली टोल छूट सुविधा के बंद होने के विरोध में किसानों के आक्रोश के बाद 3 जुलाई को होने वाली महापंचायत और उसके डर से यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा फिर से किसानो की मांग से सहमति जताते हुए टोल मुफ्त खोरी को पुन: शुरू करने का आश्वासन दिया जाना है । प्रेस विज्ञप्ति जारी होने तक सभी किसान संगठनों की टोल सुविधा बहाल कर दी गई, जिसके बाद 3 जुलाई को प्रस्तावित धरना एवं महापंचायत स्थगित कर दी गई।

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असल में हम हमारे देश में हम भारतीय भारत में कुछ चीजों को संविधान के तहत दिया हुआ अपना सामान्य अधिकार मानते हैं । किसान, मजदूर, व्यापार, बार, पत्रकार ऐसे तमाम संघ की आड़ में इस तरह की मुफ्तखोरियों की हमें पूरी आदत है। टोल से लेकर तमाम जगह हम खुद को विशिष्ट बढ़कर नियमों को तोड़ना अपनी शान समझते हैं । और इसके लिए अलग-अलग कारण देने लगते हैं जैसे किसानो की गाड़ियों के टोल फ्री करने के लिए किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने एहसान जताते हुए कहा कि देशभर की सड़के किसानो की भूमि से बनी ऐसे में उनका टोल से छूट मिल लिया आवश्यक है । अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों की टोल सुविधा किसी की कृपा नहीं बल्कि किसानों के संघर्ष और उनके अधिकारों का परिणाम है, वो अलग बात है कि वो कृपा को अधिकार बताकर अपनी आँखों में मर गयी उस शर्म से बचना चाहते है जो जिन्दा होनी चाहिए थी।

फिर भी एक तरीके से बात तो उनकी भी सही है जब जजों को, नेताओं को, खिलाड़ियों को और तमाम टाइप के एनजीओ को किसी न किसी बहाने से टोल भरने से छूट मिल सकती है तो फिर किसानों को क्यों ना मिले किंतु इन सब के बीच उसे एक आम आम का क्या जो इन सब मुफ्तखोरों के लिए टैक्स पे करता है, टोल भी पे करता है और तमाम तरीके की रंगदारी और अवैध वसूली भी देता है और कई बार इन्ही टोल कर्मियों से पिट कर अपना राष्ट्रीय कर्तव्य भी निभाता है। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चन्द्र बोस की आत्मा अगर कहीं स्वर्ग से नीचे आज के भारत को देखती होगी तो अपने साथियो से कहती होगी यार हम किनके लिए मर गएI

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आज ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़े चर्चित निजी अस्पताल पर 10 लाख का अर्थदंड इसलिए लगाया कि उस निजी अस्पताल ने भी मुफ्तखोरी की आदत के चलते ही बस शेल्टर पर अनाधिकृत तोर पर अपने विज्ञापन लगा दिए थे I वो अलग बात है कि ऐसे बड़े अस्पतालो के मालिक जगह जगह मुफ्त में स्वास्थ्य कैम्प भी लगाते है और बताते हैं कि वो कैसे सेवा कर रहे है। यानी जो जितना बड़ा नाम वो उतना बड़ा मुफ्तखोर I

ऐसे में मुझे यमुना प्राधिकरण के किसानों के टोल फ्री करने पर बहुत ज्यादा एतराज नहीं है किंतु उनकी विशिष्टता के इस कारण पर एतराज है। मुझे मुफ्त खोरी की उस आदत पर एतराज है जो 30 लाख की फॉर्च्यूनर खरीदने के बाद ₹300 का टोल देने में शर्म महसूस करती है। जिसको इस देश के लिए किए गए हर कार्य को एहसान बना कर उसके बदले कुछ विशिष्ट अधिकार तो चाहिए किंतु कर्तव्यों के मामले में स्वयं भूल कर कहीं ओर देखने लगते है ।

ऐसे सभी लोग अक्सर बातचीत में यह कहते हुए मिल जाएंगे कि चीन और अमेरिका में लोग तरक्की करते हैं वहां नए-नए इनोवेशन होते हैं और हमारे देश में कुछ नहीं होता है किंतु वह स्वयं नहीं बताते हैं कि उनके और उनके आसपास के लोगों में किसने किसी इनोवेशन के लिए कुछ प्रयास किया क्योंकि सारी चक्कलस और गप्पबाजी के बाद हमारा मूल मन्त्र यही है कि किस तरीके से टोल या अन्य संसाधनों को मुफ्त में लिया जा सके और उसको लेकर हम जोर से भारत माता की जय बोल कर अपनी देशभक्ति तय कर सके ।

क्या अब समय नहीं आ गया है कि अब हम मुफ्त खोरी के अधिकार की जगह आत्मचिंतन करें कि क्या सच में हम एक विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहे हैं या केवल एक ऐसी भीड़ बन गए हैं जो अधिकारों के लिए तो दहाड़ती है, लेकिन कर्तव्यों के नाम पर चुप्पी साध लेती है।

अंत में अगर इस आलेख को पढ़कर अगर आपकी भावनाएं आहत होती हैं तो वह बिल्कुल आहत होनी चाहिए और मुझे उन्हें आहत करने में कोई शर्म नहीं क्योंकि इस भावना को आहत करने की मुफ्त खोरी का आनंद मैं भी लेना चाहता हूं।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे