गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) की बैठक में निजी स्कूलों द्वारा की गई फीस वृद्धि की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनपद के सात प्रतिष्ठित निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
7.23 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. धर्मवीर सिंह (संदर्भित नाम चंदशेखर लेख के अनुसार) ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के प्रावधानों के तहत शैक्षणिक सत्र के लिए फीस वृद्धि की एक अधिकतम सीमा निर्धारित है। वर्तमान नियमों के अनुसार, स्कूल शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
जांच के दौरान छह स्कूलों को इस निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलते हुए पाया गया। इन स्कूलों में शामिल हैं:
एपीजे इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा
स्पर्श ग्लोबल स्कूल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट
रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-50
विश्व भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-28
श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल, सिटी सेंटर
सेंट जोसेफ स्कूल, सेक्टर-2

अधिनियम की धारा 4(1) के तहत इसे पहली बार किया गया उल्लंघन मानते हुए समिति ने प्रत्येक स्कूल पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
बाल भारती स्कूल पर अतिरिक्त शुल्क के लिए कार्रवाई
इन छह स्कूलों के अतिरिक्त, सेक्टर-21 स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस स्कूल पर आरोप है कि इसने वर्ष 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया और कंपोजिट फीस के अलावा अतिरिक्त वार्षिक शुल्क की वसूली की, जो नियमों के विरुद्ध है।
अभिभावक संघ ने जताई आशंका
प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद, अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। संघ का कहना है कि पूर्व में भी इस तरह के जुर्माने लगाए गए हैं, लेकिन कई स्कूल इन्हें जमा नहीं करते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि विभाग द्वारा की जाने वाली यह कार्रवाई अक्सर केवल औपचारिक नोटिस तक सीमित रह जाती है और स्कूलों पर ठोस लगाम नहीं कसी जाती।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी स्कूलों की फीस संरचना की निगरानी जारी रहेगी और नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पेशेवरों और अभिभावकों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।



